बोकारो (झारखंड), 16 अप्रैल:
झारखंड के बोकारो जिले में बहुचर्चित पुष्पा महतो अपहरण और हत्या मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने पिंड्राजोरा थाने में तैनात 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई में 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने मुख्य अभियुक्त के साथ सांठगांठ कर जांच को कमजोर किया।
यह कार्रवाई झारखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद संभव हो सकी। पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर बोकारो के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। नई एसआईटी ने 11 अप्रैल को मुख्य अभियुक्त दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर पुष्पा महतो के कथित कंकाल के अवशेष बरामद किए गए।
एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार, कंकाल के डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया जारी है और अभियुक्त के खिलाफ हत्या की धाराएं जोड़ी गई हैं। जांच के दौरान हत्या में प्रयुक्त हथियार, कपड़े, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
पीड़िता के पिता अनंत महतो ने पुलिस की शुरुआती भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि 21 जुलाई 2025 को बेटी के लापता होने के समय ही पुलिस सक्रिय हो जाती, तो शायद उनकी बेटी आज जीवित होती। उनकी पत्नी रेखा देवी ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआती दिनों में प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल की और संदिग्ध पर कार्रवाई नहीं की।
हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पहले भी जांच के प्रयास किए गए थे, लेकिन संतोषजनक परिणाम न मिलने पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया।
एसआईटी प्रमुख डीएसपी आलोक रंजन के अनुसार, पूर्व जांच में अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अभियुक्त से पैसे लिए और उसके साथ संपर्क में रहे।
मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद निलंबित कर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
इधर, पीड़ित परिवार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

