पश्चिम एशिया में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि युद्धविराम की शेष अवधि के लिए इस समुद्री मार्ग से सभी वाणिज्यिक जहाज़ों की आवाजाही पूरी तरह खोल दी गई है।
अपने पोस्ट में अराग़ची ने कहा कि लेबनान में संघर्ष विराम के बाद क्षेत्रीय हालात को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से व्यापारिक जहाज़ों का आवागमन बाधित नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल मौजूदा युद्धविराम अवधि तक लागू रहेगी, जो 22 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।
इससे पहले अमेरिका ने इस हफ़्ते घोषणा की थी कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट में नौसैनिक नाकाबंदी शुरू करेगा। वहीं ईरान ने फरवरी में अमेरिका-इसराइल हमलों के जवाब में इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग को कुछ हफ्तों तक प्रभावी रूप से बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा था।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच वर्तमान में दो हफ़्ते का युद्धविराम लागू है, जिसके दौरान क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिशें की जा रही हैं। ईरान ने पहले लेबनान सहित पूरे मध्य-पूर्व में युद्धविराम को बातचीत की शर्त के रूप में रखा था, हालांकि अमेरिका और इसराइल ने इसे समझौते का हिस्सा मानने से इनकार किया था।
उधर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने सरकारी टीवी को बताया कि होर्मुज़ स्ट्रेट से सैन्य जहाज़ों की आवाजाही अभी भी प्रतिबंधित रहेगी। केवल वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाज़ों को ही अनुमति दी गई है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया देते हुए पहले ईरान के निर्णय का स्वागत किया और इसे “सकारात्मक संकेत” बताया। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने एक और पोस्ट में कहा कि अमेरिकी नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी।
ट्रंप ने दावा किया कि यह नाकाबंदी केवल ईरान पर केंद्रित होगी और तब तक जारी रहेगी जब तक तेहरान के साथ चल रही बातचीत पूरी तरह से अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच जाती। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई मुद्दों पर पहले ही सहमति बन चुकी है और प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है।
फिलहाल युद्धविराम की अवधि और आगे की कूटनीतिक बातचीत पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

