नई दिल्ली। देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कार्यरत लाखों कर्मचारी और अधिकारी सरकार की कथित वादा खिलाफी से आक्रोशित हैं। ऑल इंडिया रीजनल रूरल बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (अरेबिया) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन के वरिष्ठ नेता के.के. श्रीवास्तव ने कहा कि यह आंदोलन “सड़क से संसद तक” चलाया जाएगा।
अरेबिया के महासचिव एस. बैंकटेश्वर रेड्डी ने सभी इकाइयों को भेजे पत्र में बताया कि केंद्र सरकार ने पदोन्नति नियमों में संशोधन, नई मानव संसाधन नीति लागू करने, 25 हजार से अधिक रिक्त पदों पर कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण और 12वें वेतन समझौते के लाभ लागू करने का आश्वासन दिया था। हालांकि अब तक इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
संगठन ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा भी जारी की है। इसके तहत 1 मई 2026 से ‘वर्क टू रूल’ अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कर्मचारी केवल निर्धारित नियमों के अनुसार कार्य करेंगे और बैंक के व्हाट्सएप समूहों का बहिष्कार करेंगे। इसके बाद 6 मई 2026 को देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही कर्मचारियों द्वारा देशभर के सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। नाबार्ड और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उच्च अधिकारियों को भी मांगों से अवगत कराया जाएगा। संसद सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर धरना देने की भी योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे चलकर एक दिन की देशव्यापी हड़ताल भी की जाएगी।
अरेबिया नेताओं का कहना है कि एक ओर सरकार ग्रामीण बैंकों के विलय और सुदृढ़ीकरण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

