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डीलिमिटेशन बिल पर संसद में घमासान, सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव

नई दिल्ली, 16 अप्रैल:
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए डीलिमिटेशन (परिसीमन) विधेयक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अमित शाह ने विपक्ष के विरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर “करारा जवाब” देगी, वहीं के. सी. वेणुगोपाल ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध दर्ज कराया।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इसके साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुरूप है, जिसे 2023 में पारित किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को आगामी जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने इसे “खतरनाक राजनीतिक खेल” करार देते हुए कहा कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया के जरिए 2029 के चुनावों में अपने पक्ष में समीकरण बनाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीलिमिटेशन आयोग को सरकार नियंत्रित करेगी, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

दक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है। एम. के. स्टालिन ने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिण भारत के साथ अन्याय है और इससे उनका संसदीय प्रतिनिधित्व कमजोर होगा। वहीं पिनराई विजयन ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को इस प्रक्रिया में नुकसान हो सकता है।

विपक्ष का मुख्य तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण उत्तर भारत के राज्यों को अधिक लाभ पहुंचा सकता है, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों की हिस्सेदारी घट सकती है। साथ ही, महिला आरक्षण को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिलेगा और महिला आरक्षण के जरिए लोकतंत्र में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और सभी पक्ष अपनी बात संसद में रख सकते हैं।

संसद के विशेष सत्र में 16 से 18 अप्रैल तक इस विधेयक पर चर्चा निर्धारित है। यदि यह पारित हो जाता है, तो 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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