2 फरवरी 2026।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। JSAI का कहना है कि बार-बार नीतिगत घोषणाओं और बजट आवंटन बढ़ाने के दावों के बावजूद, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर निर्धारित बजट का उपयोग नहीं किया।
CAG ऑडिट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय कुल 1,32,749 करोड़ रुपये खर्च करने में विफल रहा। यह स्थिति तब है, जब देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा, मानव संसाधन और आवश्यक सेवाएं पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं।
GDP के अनुपात में खर्च अब भी बेहद कम
JSAI का कहना है कि केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन में बढ़ोतरी के बावजूद, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च 0.29% से 0.31% के आसपास ही सिमटा हुआ है। यह आंकड़ा सरकार की उस प्रतिबद्धता से काफी कम है, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को GDP के 5% तक ले जाने की बात कही गई थी।
लगातार बन रहा है ‘लैप्स बजट’ का चलन
पिछले वर्षों के बजट आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि हर साल बड़ी राशि खर्च न होकर वापस चली जाती है। वर्ष 2023-24 में ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के स्वीकृत प्रावधान 1,04,683 करोड़ रुपये में से करीब 9,122 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए। इसी तरह स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग में भी सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई।
उपकर वसूली बढ़ी, लेकिन उपयोग पर सवाल
नवीनतम CAG ऑडिट रिपोर्ट (रिपोर्ट संख्या 4, 2025) में यह भी सामने आया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर संग्रह 2018-19 में 41,310 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 61,814 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, ऑडिट यह स्पष्ट करता है कि यह उपकर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग से सुरक्षित नहीं रखे गए हैं, बल्कि भारत की संचित निधि में जमा कर दिए जाते हैं। JSAI का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित नहीं हो पाता कि स्वास्थ्य के नाम पर जुटाई गई राशि वास्तव में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में लग रही है या नहीं।
JSAI की चिंता और मांगें
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की ओर से अमूल्य निधि और गोरांगों मोहपात्रा ने कहा कि कम आवंटन के बावजूद लगातार कम खर्च करना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। JSAI का कहना है कि CAG और लोक लेखा समिति की बार-बार चेतावनियों के बावजूद यथार्थवादी बजटीय योजना की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
JSAI ने मांग की है कि CAG संसद सत्र के दौरान 2024-25 से संबंधित प्रमुख वित्तीय खातों की चिंताओं को तत्काल जारी करे। साथ ही स्वास्थ्य उपकर को विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा जाए और राज्यों की वित्तीय क्षमता को मजबूत किया जाए।

