सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मंगलवार रात 8 बजे (वॉशिंगटन समय) तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इस बीच, कई देश अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। ताज़ा उदाहरण फिलीपींस का है, जिसने अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ समझौता किया है। इससे पहले भारत और पाकिस्तान भी ऐसे कदम उठा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल पर काफी निर्भर है। ऐसे में होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह का व्यवधान उनके लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकता है।
तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों के जवाब में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की चेतावनी दी। इसके बाद यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है।
उल्लेखनीय है कि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। हालिया घटनाक्रम के कारण यहां जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है।
यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर न केवल तेल बाजार बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक रूप से पड़ सकता है।

