शिमला, 1 अप्रैल 2026:
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने शूलिनी विश्वविद्यालय में एमबीए के छात्र नितिन चौहान की मौत को “संस्थागत हत्या” करार देते हुए गहरा शोक और आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन, प्लेसमेंट तंत्र और शिक्षकों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, रोहड़ू निवासी नितिन चौहान एमबीए के चौथे सेमेस्टर के छात्र थे। 28 मार्च की देर शाम उन्होंने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उनकी बहन ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई।

SFI का आरोप है कि नितिन शोषणकारी इंटर्नशिप और प्लेसमेंट व्यवस्था से गुजर रहे थे। दूसरे सेमेस्टर की इंटर्नशिप के दौरान उनसे ऐसे कार्य कराए गए, जिनका उनके शैक्षणिक प्रशिक्षण से कोई संबंध नहीं था। वहीं, चौथे सेमेस्टर में प्लेसमेंट के दौरान उन्हें ₹40,000 मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया, जिसे बाद में घटाकर ₹25,000 कर दिया गया। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
संगठन ने यह भी बताया कि बाद में उन्हें नोएडा की एक कंपनी में भेजा गया, जहां कम वेतन के साथ कठोर और शोषणकारी शर्तें लागू थीं। कुछ समय बाद उन्हें वहां से भी हटा दिया गया। इस दौरान न तो विश्वविद्यालय प्रशासन और न ही शिक्षकों से उन्हें कोई सहायता मिली, बल्कि उनसे हॉस्टल शुल्क भी वसूला जाता रहा।

SFI ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अपने “100% प्लेसमेंट” और “मिशन 130” जैसे दावों के जरिए छात्रों को आकर्षित करता है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें संदिग्ध और शोषणकारी कंपनियों में भेजा जा रहा है।
संगठन ने इस घटना को व्यापक संस्थागत विफलता का उदाहरण बताते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती उदासीनता, मानसिक उत्पीड़न और शिकायतों की अनदेखी छात्रों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र आत्महत्याओं पर जताई गई चिंता का उल्लेख करते हुए SFI ने कहा कि संस्थानों की “ड्यूटी ऑफ केयर” सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
SFI की प्रमुख मांगें:
- नितिन चौहान की मृत्यु की समयबद्ध, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
- संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन, प्लेसमेंट सेल और दोषी शिक्षकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
- जहाँ भी उकसावे (abetment), दबाव (coercion) या लापरवाही (negligence) साबित होती है, वहाँ आपराधिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
- हिमाचल प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्लेसमेंट प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा और सख्त विनियमन किया जाना चाहिए।
- छात्रों के लिए मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली सुनिश्चित की जाए।
SFI ने चेतावनी दी है कि जब तक संस्थागत जवाबदेही तय नहीं होगी और संवेदनशील तंत्र विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।

