नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने 2 अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोनिया गांधी सुबह सबसे पहले राजघाट पहुँचीं और बापू की समाधि पर पुष्प चढ़ाकर उनके आदर्शों को नमन किया। इसके बाद उन्होंने विजयघाट जाकर शास्त्री जी की समाधि पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।
सोनिया गांधी ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी ने देश को सत्य, शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया, जिसने भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में हिंसा, असहिष्णुता और विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं, तब गांधी जी का दर्शन और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। गांधी जी के विचार हमें इंसानियत, करुणा और लोकतंत्र की रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं।
शास्त्री जी को याद करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि वे सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे। उनका नारा “जय जवान, जय किसान” न केवल उनके समय में बल्कि आज भी देश के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने किसानों और सैनिकों को राष्ट्र की रीढ़ बताया और कठिन समय में भी देश को एकजुट करने की अद्भुत क्षमता दिखाई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। गांधी जी ने जहां स्वतंत्रता संग्राम में सत्य और अहिंसा का हथियार इस्तेमाल कर विश्व को दिखाया कि बिना हिंसा के भी बड़ी लड़ाई लड़ी जा सकती है, वहीं शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए अपने अदम्य साहस और सादगी से भारत को मजबूती दी।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि दी। पार्टी नेताओं का कहना था कि आज की राजनीति में जब व्यक्तिगत स्वार्थ और सत्ता की होड़ हावी हो रही है, तब गांधी और शास्त्री का आदर्श राजनीति को सही दिशा देने में सहायक हो सकता है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी 2 अक्तूबर को राजघाट और विजयघाट पर देशभर से लोग पहुँचकर दोनों महापुरुषों को नमन कर रहे हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में राजनीतिक हस्तियाँ, सामाजिक संगठन और आम नागरिक श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे।
गौरतलब है कि 2 अक्तूबर का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन उस राष्ट्रपिता का जन्मदिन है, जिन्होंने भारत को अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ादी दिलाई। इसी दिन जन्मे लाल बहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री के रूप में देश को “जय जवान, जय किसान” का मंत्र दिया और भारत की आत्मा को नई ऊर्जा दी।
सोनिया गांधी ने अंत में कहा कि हमें गांधी और शास्त्री दोनों के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। यही उनकी जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

