25 और 26 जून को चीन के किंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की अहम बैठक आयोजित होने जा रही है, जिसमें भारत, रूस, पाकिस्तान, किर्गीस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ईरान और बेलारूस के रक्षा मंत्री शिरकत करेंगे। यह बैठक कई मायनों में खास मानी जा रही है क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) एक मंच पर आमने-सामने होंगे।
भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजीत डोभाल बुधवार, 25 जून को एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के किंगदाओ पहुंचेंगे। वहीं पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और एनएसए आसिम मलिक बैठक में भाग लेंगे। अजीत डोभाल पहले से ही चीन में मौजूद हैं और सोमवार को उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।
बताया जा रहा है कि भारत इस बैठक में आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है और पाकिस्तान को सीधे तौर पर आतंकवाद को लेकर कठघरे में खड़ा कर सकता है। यह पहला मौका होगा जब दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और रक्षा मंत्री ऑपरेशन सिंदूर के बाद आमने-सामने होंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करके यह जानकारी दी कि वह एससीओ बैठक में भाग लेने के लिए चीन रवाना हो रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “एससीओ मीटिंग के जरिए विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। वैश्विक शांति, सुरक्षा और आतंकवाद को खत्म करने के लिए संयुक्त और सतत प्रयासों का आह्वान करने के लिए तत्पर हूं।”
एससीओ बैठक से इतर भारत रूस, चीन समेत अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों और एनएसए से द्विपक्षीय मुलाकातें कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान के साथ किसी तरह की द्विपक्षीय बैठक की संभावना नहीं है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) के मुद्दों पर बात नहीं करता, तब तक किसी और विषय पर कोई बातचीत नहीं होगी।
भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पाकिस्तान की धरती पर पल रहे आतंकी संगठन भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को अंजाम देते हैं। लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है, लेकिन पाकिस्तान बार-बार इससे इनकार करता रहा है और अब खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर जैसे नेताओं ने साफ तौर पर कहा है कि “व्यापार और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते।” भारत का स्पष्ट रुख है कि पाकिस्तान को आतंकवादियों को भारत को सौंपना होगा और जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से को खाली करना होगा जिस पर उसने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। जब तक ये मसले हल नहीं होते, तब तक पाकिस्तान से किसी भी स्तर की बातचीत नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि एससीओ की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी और भारत 2017 में इसका पूर्णकालिक सदस्य बना था। वर्ष 2023 में एससीओ की बैठक नई दिल्ली में हुई थी, जिसमें पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वर्चुअली भाग लिया था और भारत नहीं आए थे।
एससीओ के मौजूदा सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, किर्गीस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।

