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सुलतानपुर में स्मार्ट मीटर के विरोध में माकपा ने किया विरोध प्रदर्शन, पुराने मीटर बहाल करने की मांग तेज

सुलतानपुर। स्मार्ट मीटर और बिजली के निजीकरण के विरोध में बुधवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में विद्युत उपखंड कूरेभार (गलिबहा) पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही पुराने डिजिटल मीटर बहाल करने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने और आम जनता को “नो प्रॉफिट-नो लॉस” के आधार पर सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।

प्रदर्शन के बाद पार्टी नेताओं ने उपखंड अधिकारी अभिषेक कुमार राय को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस दौरान स्थानीय समस्याओं को लेकर भी अधिकारियों से वार्ता की गई। प्रदर्शनकारियों ने गांवों और कस्बों में बिजली के खंभे लगाने, जर्जर तारों को बदलने तथा बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की। उपखंड अधिकारी ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पार्टी जिला सचिव राधेश्याम वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बिजली विधेयक संशोधन बिल 2022 के जरिए बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी नीति के तहत स्मार्ट मीटर लागू किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि बिजली जैसी बुनियादी सामाजिक सेवा को मुनाफे का माध्यम बनाया जा रहा है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को प्रीपेड से पोस्टपेड में परिवर्तित किया है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिली है। लगातार बढ़ते बिजली बिलों और तकनीकी खामियों के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी नेताओं का कहना था कि बिजली आम जनता की जरूरत है और सरकार को इसे सामाजिक सेवा के रूप में संचालित करना चाहिए।

जिला सचिव मंडल सदस्य राज बहादुर यादव ने स्मार्ट मीटर को “जनता के साथ धोखा” बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने लोगों से इसके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। वहीं शशांक पाण्डेय ने आरोप लगाया कि आंधी और खराब मौसम के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद स्मार्ट मीटर लगातार बिल दर्ज कर रहे थे, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ा।

जवाहर लाल ने कहा कि स्मार्ट मीटर में कई तकनीकी खामियां हैं और सरकार द्वारा इसे मुफ्त में लगाए जाने का दावा भी गलत साबित हो रहा है, क्योंकि उपभोक्ताओं से इसके अलग-अलग शुल्क वसूले जा रहे हैं। लालबहादुर यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने स्मार्ट मीटर वापस नहीं लिए तो जनता स्वयं इसे हटाने का आंदोलन करेगी।

प्रदर्शन में वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण से रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे और इसका असर आम कर्मचारियों पर पड़ेगा। नेताओं ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य की तरह बिजली सेवा को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिसका विरोध किया जाएगा।

प्रदर्शन में संतराम मौर्य, जंगबहादुर वर्मा, रामराज वर्मा, प्रताप कुमार, बालकृष्ण मिश्रा, अनंतराम, मनोराम वर्मा, विजय यादव, प्रिंस, शनि, नारायण, सीमा, कंचन यादव, श्यामा देवी, किस्मता देवी, श्रीकृष्ण बरनवाल, मनीराम वर्मा, अंकित, रामकरन दुबे, रामकुमार दुबे और शिवनाथ मिश्रा समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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