बस्ती जिले के पूर्व सीओ सदर विनय चौहान की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। तीन महीने पहले सरकारी आवास में एक महिला को मारने-पीटने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विभागीय जांच के दौरान उन्हें डीजीपी कार्यालय में अटैच कर दिया गया था, और जांच के बाद अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
घटना का विवरण
यह मामला 26 मई की रात का है, जब विनय चौहान की प्रेमिका, जो एक राजस्थान की महिला अधिकारी हैं, ने उनकी पत्नी और बेटी पर बंधक बनाकर मारपीट का आरोप लगाया था। महिला अधिकारी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि विनय चौहान उसके साथ रिलेशनशिप में रहे हैं और उन्होंने मिलने के लिए उसे बुलाया था। जब वह उनसे मिलने जयपुर से बस्ती आई, तो उसी दौरान उनकी पत्नी और बेटी ने उसे कमरे में बंद करके जूतों से पीटा और काफी देर तक उसका मुंह दबाए रखा। सीओ ने भी अपनी पत्नी और बेटी का पक्ष लिया और दो महिला कॉन्स्टेबल बुलाकर उसे गिरफ्तार करवा दिया।
कानूनी कार्रवाई
महिला अधिकारी ने राजस्थान में जीओ एफआईआर दर्ज कराई, जिसे उसी दिन बस्ती ट्रांसफर किया गया और यहां एफआईआर दर्ज हुई। 10 दिन की इंटरनल जांच के बाद सीओ से सभी चार्ज वापस ले लिए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीओ विनय चौहान को 24 जुलाई को डीजीपी कार्यालय से निलंबित कर दिया गया है और जांच अभी भी चल रही है।
विभागीय प्रतिक्रिया
विनय चौहान के खिलाफ इन आरोपों के बाद, पुलिस विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें डीजीपी कार्यालय में अटैच कर दिया। जांच के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। पुलिस विभाग इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरी जांच कर रहा है ताकि दोषियों को उचित सजा मिल सके।
सीओ विनय चौहान की यह घटना एक गंभीर मामला है, जिसमें उनके खिलाफ आरोपों की पूरी जांच होनी चाहिए। पुलिस विभाग द्वारा की गई कार्रवाई इस बात का संकेत है कि विभाग किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले की आगे की जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

