अयोध्या में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत के बाद बवाल मच गया है। मृतक भास्कर पांडे, जो वकालत की पढ़ाई कर रहे थे, की मृत्यु के बाद उनके परिजन उत्तराखंड पुलिस पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि अयोध्या से रुद्रपुर ले जाने के दौरान आरोपी की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। लेकिन, मृतक के परिजनों का कहना है कि यूपी पुलिस के साथ मिलीभगत होने के कारण ही ऐसा हुआ है।
पुलिस हिरासत और भास्कर की गिरफ्तारी
भास्कर पांडे अयोध्या में रहकर वकालत की पढ़ाई कर रहे थे और अपनी परीक्षाएं दे रहे थे। आखिरी पेपर से पहले उत्तराखंड पुलिस के जवान उनसे मिलने आए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। भास्कर पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी स्लिप कार्यालय भेजकर ट्रांसपोर्टर को 52 लाख का नुकसान पहुंचाया था।
मौत के बाद का हंगामा
भास्कर के परिजनों का कहना है कि उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई और जब तक वे अयोध्या पहुंचे, भास्कर का शव जिला हॉस्पिटल में था। परिजनों ने उत्तराखंड और यूपी पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि यह हत्या की साजिश थी। भास्कर के चाचा पर भी समय से जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया है।
परिजनों की मांग
भास्कर के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड और यूपी पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि भास्कर की गिरफ्तारी के दौरान और बाद में उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भास्कर की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण उनकी मौत हो गई। मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
अयोध्या में पुलिस हिरासत में हुई युवक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के आरोप और पुलिस के दावे के बीच सच्चाई का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और पारदर्शिता पर भी प्रश्न चिह्न लगाती है। इस मामले की जांच कराकर दोषियों को सजा दिलाना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

