बस्ती: बस्ती जिला महिला अस्पताल में संचालित कैंटीन का विवाद छह महीने से जारी है। अस्पताल परिसर में दो कैंटीन संचालित हैं, जिनका आवंटन महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता देने के आधार पर किया गया था। लेकिन एक कैंटीन का आवंटन जिस महिला स्वयं सहायता समूह के नाम पर हुआ था, उसकी संचालिका एक निजी स्कूल में शिक्षक पाई गईं। जांच के बाद एडीएम ने अनुबंध निरस्त कर दिया, लेकिन कैंटीन अभी भी खाली नहीं की गई है।
कैंटीन आवंटन में गड़बड़ी
महिला अस्पताल की दो कैंटीनों में से एक, गायत्री शक्ति स्वयं सहायता समूह और उजराना शक्ति स्वयं सहायता समूह के नाम आवंटित की गई थी। शिकायत के अनुसार, गायत्री शक्ति स्वयं सहायता समूह के नाम से आवंटित कैंटीन की संचालिका एक मिशनरी स्कूल में शिक्षक हैं। जांच में पुष्टि के बाद एडीएम ने इस कैंटीन का अनुबंध निरस्त कर दिया। इसके बावजूद, एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह कैंटीन खाली नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन भी इसे खाली कराने में असमर्थ दिख रहा है, जिससे संबंधित समूह का हक मारा जा रहा है।
टिन शेड की कैंटीन और विवाद
अस्पताल परिसर में स्थित दोनों कैंटीन टिन शेड से बनी हैं। एक कैंटीन उजराना महिला समूह द्वारा संचालित की जा रही है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिकायत आई कि दूसरी कैंटीन किराये पर संचालित की जा रही है। मामले की जांच में यह पुष्टि हो गई कि यह कैंटीन प्राइवेट शिक्षक द्वारा संचालित की जा रही थी, जिससे मामला तूल पकड़ गया। हालांकि, कार्रवाई में देरी के कारण कैंटीन अभी भी अस्पताल प्रशासन के कब्जे में नहीं आ सकी है।
बीयर की दुकान का मामला
तीन महीने पहले महिला अस्पताल के बाहर चहारदीवारी तोड़कर अस्थायी टंकी रखी गई थी, जहां बीयर की दुकान संचालित होने लगी थी। इसका विरोध होने पर अस्पताल प्रशासन ने डीएम और एसपी को पत्र लिखा। इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और बीयर की दुकान बंद करवाई गई।
अधिकारियों के बयान
सीएमएस डॉ. एके वर्मा ने कहा, “जांच में महिला समूह की संचालिका के प्राइवेट शिक्षक होने की पुष्टि हुई है। कैंटीन का अनुबंध निरस्त कर दिया गया है और संबंधित संचालिका को कैंटीन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।”
एडीएम प्रीति पाल सिंह चौहान ने कहा, “अनुबंध निरस्त होने के बाद कैंटीन को खाली किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। नए मानकों के अनुसार कैंटीन का आवंटन फिर से किया जाएगा।”
इस विवाद ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है और यह देखना होगा कि कब तक यह मुद्दा हल होता है।

