बिहार में पुल गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले 11 दिनों में राज्य में पांच पुल गिर गए हैं, जिससे प्रशासन और सरकारी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। ताजा घटना मधुबनी जिले की है, जहां शुक्रवार को एक निर्माणाधीन पुल ढह गया।
मधुबनी में निर्माणाधीन पुल ढहने की घटना
मधुबनी जिले के झंझारपुर में शुक्रवार को एक निर्माणाधीन पुल ढह गया। गुरुवार को 77 मीटर लंबे इस पुल के दो खंभों के बीच गर्डर का एक हिस्सा गिर गया। प्रशासन ने टूटे हुए हिस्से को प्लास्टिक से ढकने का प्रयास किया, ताकि लोगों को इस घटना के बारे में पता न चल सके। इस पुल की अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ रुपये थी और इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाया जा रहा था। तीन दिन पहले ही इस पुल के गर्डर की ढलाई की गई थी, जो गुरुवार को गिर गया।
ठेकेदार का बयान
ठेकेदार अमरनाथ झा ने इस घटना के पीछे नदी में जलस्तर बढ़ने को कारण बताया। उन्होंने दावा किया कि जलस्तर कम होने के बाद पुल का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
नीतीश सरकार पर विपक्ष का हमला
पिछले 11 दिनों में पांच पुल गिरने की घटनाओं ने बिहार सरकार की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष ने नीतीश सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि पुल निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण ये हादसे हो रहे हैं।
पिछले घटनाओं की सूची
- 18 जून: अररिया में बकरा नदी पर 12 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल ढह गया।
- 22 जून: सीवान जिले में गंडक नदी पर बना 40-45 साल पुराना पुल गिर गया।
- 23 जून: पूर्वी चंपारण में 1.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा निर्माणाधीन पुल ढह गया।
- 27 जून: किशनगंज जिले में कंकई और महानंदा नदियों को जोड़ने वाली सहायक नदी पर बना पुल गिर गया।
- 30 जून: मधुबनी जिले के झंझारपुर में निर्माणाधीन पुल ढह गया।
बिहार में पुल निर्माण के मानकों और निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार और संबंधित विभागों को इन घटनाओं की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

