लखनऊ। 07 अप्रैल 2026
जन स्वास्थ्य अभियान, उत्तर प्रदेश द्वारा विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर 1 अप्रैल 2026 से एक सप्ताह का प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक परिचर्चा आयोजित की गई।

परिचर्चा में डॉ एस पी पांडेय, संजीव सिन्हा, प्रीति राय, डॉ प्रीति श्रीवास्तव, अजय शर्मा, जितेंद्र पांडेय, एम एच यू अंसारी, डॉ राकेश निगम, अतुल तिवारी, मीताश्री, दयानंद तिवारी, कावेरी, मनीष, विमला रावत और आलोक कुमार सहित कई वक्ता शामिल हुए।

इस दौरान जन स्वास्थ्य अभियान उत्तर प्रदेश के संयोजक संजीव सिन्हा ने कहा कि व्यावसायिक स्वास्थ्य की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में मजदूर सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि खनन सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) द्वारा 10 अप्रैल 2017 को सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत शपथ पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश में 6916 मजदूर सिलिकोसिस से प्रभावित हैं।
जितेंद्र पांडेय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की “खतरनाक और अन्य अपशिष्टों के उत्पादन और प्रबंधन पर राष्ट्रीय इन्वेंट्री (2022-23)” रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश में 83,682 और उत्तर प्रदेश में 2879 इकाइयाँ खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न कर रही हैं, जिसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

डॉ प्रीति श्रीवास्तव और अजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सिलिकोसिस से पीड़ित मजदूरों की संख्या अधिक है, लेकिन उनके अधिकारों के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हो रहे हैं। वहीं प्रीति राय ने कहा कि अभियान को अन्य जिलों में भी आगे बढ़ाया जाएगा।
कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य अभियान उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ एस पी पांडेय ने सरकार से आमजन और गरीबों के लिए बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की मांग की।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों के बीच जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा जारी मांग पत्र और जनजागरूकता पर्चे भी वितरित किए गए।

