इटावा। चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान दिवस के अवसर पर चंबल संग्रहालय, पंचनद द्वारा लाल सेना स्मारक, लुहिया खुर्द गांव में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान एवं अमर शहीद आज़ाद को पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। इस अवसर पर आज़ाद के जीवन और क्रांतिकारी योगदान पर केंद्रित दुर्लभ प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका उद्घाटन गुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर, हापुड़ के उप-प्राचार्य आचार्य कुशलदेव ने किया।
समारोह के अंतर्गत चंबल वालीबॉल चैंपियनशिप का उद्घाटन चंबल अंचल के क्रांतिकारी लेखक एवं विचारक देवेंद्र सिंह चौहान ने फीता काटकर तथा खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। इसके बाद आयोजित सेमीनार सत्र में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से आज़ाद और संस्कृत विषय पर केंद्रित विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। सेमीनार को संबोधित करते हुए आचार्य कुशलदेव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने भारतीय संस्कृति और संस्कृत को अपना मूलमंत्र मानकर सर्वस्व न्योछावर किया और राष्ट्र के लिए प्रेरणा स्रोत बने। साहित्यिक पत्रिका ‘किस्सा कोताह’ के संपादक ए. असफल ने कहा कि आज़ाद का संदेश था— दुश्मन की गोलियों का सामना करो, पर कभी समर्पण मत करो। उन्होंने कहा कि आज़ाद महिलाओं के प्रति विशेष सम्मान रखते थे और अंग्रेज उनसे भयभीत रहते थे।

अतिथि गजेंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि चंबल घाटी को वर्षों तक डकैतों के नाम पर बदनाम किया गया, किंतु डॉ. शाह आलम राणा एवं इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान द्वारा निरंतर प्रयास कर इस क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में समारोह और प्रतियोगिताओं का आयोजन कर समाज को जागरूक किया जा रहा है। सूरज रेखा त्रिपाठी एडवोकेट ने अचूक निशानेबाज आज़ाद को क्रांतिकारी संगठन का ‘सुपर हीरो’ बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ लेखक देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सहस्त्रों शहीदों की आकाशगंगा में चंद्रशेखर आज़ाद जगमगाते सितारे हैं। उन्होंने चंबल क्षेत्र के महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी का गठन किया और उसे अनुकरणीय ढंग से संचालित किया। समारोह को आचार्य अरुण कुमार द्विवेदी, डॉ. शाह आलम राणा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। संचालन चंद्रोदय सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर चन्द्रवीर चौहान, धर्मेन्द्र सिकरवार, अशोक यादव, जय प्रकाश सोनी, जयेन्द्र चौहान, आसिव शंखवार, अमर सिंह तोमर आदि ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
डाबर संग्रहालय के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ी दुर्लभ सामग्रियों का प्रदर्शन किया गया। इनमें वर्ष 1926 के काकोरी केस के क्रांतिकारियों का विवरण एवं चार्जशीट, आज़ाद के अंतिम दर्शन के चित्र, झांसी में मास्टर रुद्रनारायण द्वारा खींचा गया छायाचित्र, काकोरी ट्रेन एक्शन स्थल का चित्र, जगरानी देवी सहित अन्य क्रांतिकारियों के समूह चित्र, बनारस में अस्थिकलश के साथ क्रांतिकारियों के फोटो, अल्फ्रेड पार्क में शहादत के बाद का दृश्य, आज़ाद का कोल्ट रिवॉल्वर, विभिन्न ऐतिहासिक समाचार पत्रों में प्रकाशित लेख और प्रतिबंधित पुस्तकें प्रमुख रहीं। साथ ही वर्ष 1922 में बनारस से लिखा गया आज़ाद का पत्र भी प्रदर्शित किया गया।
चंबल वालीबॉल चैंपियनशिप में विवेक विहार, सैफई, कुसैली (ए), कुसैली (बी), गंगापुरा, हैवरा, दरयाय के नगरा तथा लुहिया खुर्द की टीमों ने प्रतिभाग किया। फ़ाइनल मैच हेवरा और कुसैली (ए) के बीच खेला गया, 6 पॉइंट बढ़त हेवरा फाइनल जीत दर्ज की. फाइनल मुकाबले के बाद विजेता और उपविजेता टीमों को शील्ड एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। रेफरी की भूमिका जितेन्द्र यादव और अनिकेत शांखवार ने निभाई। अंत में सभी खिलाड़ियों एवं अतिथियों ने सहभोज में भाग लिया।

