अयोध्या। जनवादी लेखक संघ, फ़ैज़ाबाद की मासिक गोष्ठी एवं तदनंतर रचना-पाठ का कार्यक्रम गुप्तार घाट स्थित उद्यान परिसर में आयोजित किया गया। रचना-पाठ में साथी संगठनों के रचनाकारों सहित अन्य कई लेखकों एवं साहित्यप्रेमियों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर आलोचक डॉ. रघुवंशमणि ने हिंदी की महत्वपूर्ण पत्रिका ‘पहल’ के संपादक कथाकार ज्ञानरंजन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पत्रिका के माध्यम से ऐसे कई रचनाकारों को सामने लाने का काम किया, जो आज साहित्य में अत्यंत महत्व रखते हैं। पहल में छपने का अर्थ होता था कि समूचा हिंदी समाज आपको पढ़ और जान रहा है। उन्होंने कहा कि संपादक के रूप में ज्ञानरंजन की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने साहित्य के सामाजिक उद्देश्य को सामने रखा। वे ऐसे संपादक थे, जो हर छोटे-बड़े रचनाकार को बाकायदा पत्र लिखकर उत्तर देते थे। ज्ञानरंजन जी की दुनिया भर के लेखन के बारे में अद्भुत जानकारी थी। हिंदी समाज को उनसे और अधिक संवाद करने की ज़रूरत थी।

वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव ने कवि विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े संस्मरणों को सुनाते हुए उनकी मशहूर कविता ‘रायपुर संभाग’ का ज़िक्र किया और बताया कि कैसे वे उसे सुनाते हुए अत्यंत भावुक हो गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार लेखन में प्रतिबद्धता का तत्व बहुत सामने से न दिखते हुए भी अंतर्वस्तु में समाहित होता है।
डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने इन दोनों रचनाकारों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कई बार लेखक स्पष्ट तौर पर किसी वैचारिक संगठन का हिस्सा नहीं होता, लेकिन उसके लेखन का समग्र प्रभाव अत्यंत प्रगतिशील होता है। उन्होंने प्रसिद्ध दलित लेखक-कवि डॉ. सी.बी. भारती की वैचारिक कविता ‘यह कैसा लोकतंत्र’ का पाठ उपस्थित प्रबुद्धजनों के बीच किया।
कार्यक्रम में हिंदी-अवधी के महत्वपूर्ण रचनाकार आशाराम ‘जागरथ’ सहित जलेस के सदस्यों जे.पी. श्रीवास्तव, डॉ. नीरज सिन्हा ‘नीर’, अखिलेश सिंह, पूजा श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव, रविंद्र कबीर, शिवांगी, विजय श्रीवास्तव तथा ओम प्रकाश रोशन ने अपनी रचनाएँ सुनाईं।
सांगठनिक सत्र की अध्यक्षता इकाई के अध्यक्ष मो. ज़फर ने की तथा पूरे कार्यक्रम का संचालन कोषाध्यक्ष एवं कार्यकारी सचिव मुज़म्मिल फिदा द्वारा किया गया। सत्यभान सिंह ‘जनवादी’ ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए इस तरह के कार्यक्रमों की निरंतरता पर ज़ोर दिया।
इससे पहले जनवादी लेखक संघ इकाई की पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की गई और सदस्यता के नवीनीकरण, विगत आयोजनों की समीक्षा तथा आगामी कार्ययोजनाओं के बारे में विचार किया गया।
कार्यक्रम में बृजेश कुमार श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, साधना सिंह, दीपक, महावीर पाल, संदीप सिंह, शालिनी सिंह, तिलक राज तिवारी, विनय पाठक, अजय बाबा, सिद्धार्थ आनंद सहित कई साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

