क्यों शुरू हुआ अयोध्यावासियों का बहिष्कार
भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी लल्लू सिंह के चुनाव हारने के बाद से लगातार सोशल मीडिया पर कुछ तथाकथित हिंदुत्व के रक्षकों द्वारा अयोध्यावासियों को अमर्यादित शब्दों द्वारा बहिष्कार किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि अयोध्या जो की आस्था की नगरी उसे राजनैतिक नगरी बनाने के पीछे किन ताकतों का हाथ है? क्या ऐसा करना धर्म का अपमान नहीं है? धार्मिक मसलों को राजनैतिक दल द्वारा भुनाने का प्रयास आख़िर कहाँ तक न्यायोचित है?
बहिष्कार में क्या -क्या है शामिल
जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर यह लिखा है कि अयोध्या हनुमानगढ़ी जाएं मगर प्रसाद अपने घर से ले जाएं। उन लोगों को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या -क्या इन झूठे हिंदुत्व के रक्षकों द्वारा बहिष्कार किया जायेगा? क्या बहिष्कार करेंगे परिक्रमा और कातिक मेले का या फिर ये परंपरागत रीति – रिवाजों का? हर किसी को यह मालूम है बस्ती मंडल के तमाम संपन्न लोगों द्वारा कई शुभ कार्यों के साथ मृत्यु के उपरांत अंतेष्ठि अयोध्या में नहीं किया जायेगा? अगर ऐसा होता है तो निश्चित ही यह परंपरा पर कुठाराघात सिद्ध होगा। ऐसे में किसी भी दृष्टिकोण से ऐसे लोग हिंदू धर्म के लिए घातक सिद्ध होंगे।

क्या अयोध्या में हारने वाला ही हिंदू
लोगों ने इस बढ़ते विवाद पर आगे आकर कहा कि जिस मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की नगरी के लोगों पर अमानवीय सवाल उठाया जा रहा उनकी चरणों की धूली वो नहीं। पूर्व राज्यमंत्री पवन पाण्डेय ने भी अपने बयान में कहा कि भगवान राम ने जिस प्रकार शबरी का बेर खाया और केवट से मित्रता की ठीक वैसे ही पुनः रामलला ने धर्म के ठेकेदारों को हरा कर पूरे देश में संदेश दिया है कि धर्म के नाम का धंधा बंद होना चाहिए। जीतने वाले सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद भी हिंदू ही हैं। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने पहले ही यह बात कही थी कि अयोध्या की सीट पर खतरा है भाजपा के लिए।
क्या कारण बताए जा रहे इस हार के पीछे
ऐसा विशेषज्ञों द्वारा साक्षात्कार में बताया जा रहा कि जिस प्रकार अयोध्या के लोगों का घर गलत तरीके से ढहा कर कईयों मंदिरों को तोड़ निर्माण कार्य किया गया, इससे लोगों में नाराज़गी थी। हमारी टीम द्वारा चुनाव के दौरान लोगों से बात करने पर बताया गया कि हम छोटे दुकानदारों को उजाड़कर धार्मिक नगरी को पर्यटक स्थल में बदलाव किया गया। हमें इससे परहेज नहीं मगर हमारे लिए उचित प्रबंध सरकार द्वारा किया जाना चाहिए था। पहले लोग अयोध्या के हर छोटे – बड़े मंदिरों में जाते थे मगर आया सरयू स्नान के बाद नागेश्वर नाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल, राम जन्म भूमि ही श्रद्धालु जाते हैं मगर आज छोटे मंदिरों से भी बड़ी मात्रा में कर वसूला जा रहा है। ऐसी ही तमाम कारण लोगों ने बताया जो अयोध्या में भाजपा के हार का मुद्दा बना।
भाजपा प्रत्याशी व पूर्व सांसद रहे लल्लू सिंह का बयान
2024 लोकसभा चुनाव में अन्य मुद्दों के साथ ही भाजपा नेता अनंत हेडगे से शुरू होकर लल्लू सिंह द्वारा संविधान बदले जाने की बात कहीं न कही लोगों के मन में बैठ गई। विपक्ष द्वारा यह मुद्दा लगातार उठाया गया जिससे बड़ी संख्या में दलित वोटर भी संविधान बचाने के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के साथ आए और पूरे उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में दलित वोटर प्रभावित होते दिखा। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन भी आकाश आनंद के निलंबन के बाद शक के दायरे में सिमट गया था।

