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गिरधरपुर में बुज़ुर्ग पर दबंगों का हमला — 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं, पुलिस पर पक्षपात व धमकाने के आरोप

गोरखपुर (बांसगांव):
जनपद गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के गिरधरपुर गाँव में दबंगों द्वारा एक बुज़ुर्ग पर जानलेवा हमला किए जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता और पक्षपात पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस न केवल कार्रवाई करने में टालमटोल कर रही है, बल्कि दबंगों का पक्ष लेकर घायल बुज़ुर्ग को ही धमका रही है, जो न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर गहरी चोट है।

क्या है मामला

गांव के आदरणीय बुज़ुर्ग त्रिलोकी नाथ पांडे पर शुक्रवार को रास्ते में कुछ लोगों — अनूप नायक पुत्र श्रवण नायक, अभिषेक नायक पुत्र श्रवण नायक और विवेक नायक पुत्र श्रवण नायक — ने हमला कर दिया। इस दौरान त्रिलोकी नाथ पांडे को गंभीर चोटें आईं।
पीड़ित पक्ष ने तत्काल थाना गगहा में लिखित शिकायत दी, लेकिन 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस पर गंभीर आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया है कि थाना इंचार्ज दबंगों का पक्ष लेते हुए पीड़ित को ही डराने-धमकाने व उल्टा बुजुर्ग पर SC/ST क़ायम करने की बात कर रहे हैं ।
जब मीडिया कर्मियों ने मामले में अपडेट जानने का प्रयास किया, तो थाना इंचार्ज का कथित बयान था —

“क्या आप मुझे धमकी दे रहे हैं?”

यह बयान पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

संवैधानिक अधिकारों का हनन

भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को समान संरक्षण और न्याय पाने का अधिकार प्राप्त है।
वहीं, पुलिस अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत किसी भी पीड़ित की शिकायत पर न्यायोचित और निष्पक्ष जांच पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में यदि पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की है, तो यह न केवल CrPC की धारा 154 का उल्लंघन है, बल्कि पीड़ित के मौलिक अधिकारों का भी हनन है।

ग्रामीणों का आक्रोश और मांग

गिरधरपुर के ग्रामीणों ने कहा कि “पुलिस अगर दबंगों का संरक्षण करती रही, तो आम नागरिकों में भय और अविश्वास बढ़ेगा।”
उन्होंने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और राज्य मानवाधिकार आयोग से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे थाने के बाहर धरना व प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

प्रशासन की जिम्मेदारी

कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था में पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
ऐसे में, इस मामले में देरी और पक्षपात जैसी शिकायतें न केवल जनविश्वास को कमजोर करती हैं, बल्कि पुलिस प्रणाली की नैतिक और कानूनी जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न उठाती हैं।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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