कप्तानगंज (बस्ती):
कप्तानगंज विकासखंड के तिलकपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत गंगापुर गांव में स्थित काली माता मंदिर के पास एक सांड की मौत विषैले जीव के काटने से हो गई। यह स्थान गांव के मुख्य प्रवेश मार्ग पर है, जहाँ से रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मृत सांड का शव कई घंटों से वहीं पड़ा हुआ है और अब सड़ने लगा है, जिससे पूरे इलाके में तेज़ दुर्गंध फैल गई है। गांव में प्रवेश का मुख्य रास्ता होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में ग्राम प्रधान और सफाईकर्मी दोनों को सूचना दी, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि सफाईकर्मी ने पहले जानकारी ली, लेकिन बाद में अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। इससे नाराज़ ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृत सांड के शव को तत्काल हटवाया जाए और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।
कानूनी जिम्मेदारी और योजना के प्रावधान
गांवों में मृत पशुओं के निपटान की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है। यह जिम्मेदारी स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत आती है।
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की इस योजना के Solid and Liquid Waste Management (SLWM) घटक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि —
“ग्राम पंचायत मृत जानवरों के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करेगी।”
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 15(ग) के अनुसार,
“ग्राम पंचायत का कर्तव्य होगा कि वह ग्राम की स्वच्छता, जल निकासी और मृत पशुओं के निपटान की व्यवस्था करे।”
इन प्रावधानों के बावजूद, गंगापुर गांव में कई घंटे तक शव का वहीं पड़ा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों का भी उल्लंघन है।
यदि मृत सांड की मौत किसी संक्रामक कारण से हुई हो, तो इसकी सूचना ग्राम पंचायत प्रतिनिधि द्वारा पशुपालन विभाग को देना भी आवश्यक है, जैसा कि The Prevention and Control of Infectious and Contagious Diseases in Animals Act, 2009 में प्रावधान है।
ग्रामीणों ने कहा कि यह घटना न केवल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को ठेस पहुँचाती है, बल्कि पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए एक आपात स्वच्छता तंत्र (Rapid Sanitation Response System) स्थापित करना चाहिए, ताकि गांवों में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।

