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जनपद बस्ती में कावड़ यात्रा की आड़ में सुनियोजित हिंसा की साजिश, पुलिस ने दर्ज किया मामला

बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में 21 जुलाई को कावड़ यात्रा के दौरान हुई हिंसक घटना अब एक सामान्य झड़प नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साज़िश के रूप में सामने आ रही है। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी और शुरुआती जांच से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित थी, जिसका उद्देश्य धार्मिक यात्रा की आड़ में अशांति फैलाना, आम जनता और श्रद्धालुओं को भड़काना तथा शासन-प्रशासन की छवि को ठेस पहुंचाना था।

घटना शाम को राष्ट्रीय राजमार्ग (अयोध्या-गोरखपुर) पर कप्तानगंज चौराहे के पास घटित हुई, जहां कावड़ भेष में शामिल एक हिंसक समूह ने अचानक सड़कों पर कब्ज़ा कर लिया। थानाध्यक्ष कप्तानगंज की तहरीर के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम का नेतृत्व सर्वेश यादव उर्फ राहुल यादव (निवासी ग्राम तुर्कवलिया बड़की करमहिया, थाना सोनहा) कर रहा था, जो अपने 15–20 अज्ञात साथियों के साथ योजनाबद्ध ढंग से मौके पर पहुँचा था।

पुलिस का कहना है कि उक्त समूह एक पूर्व चोरी और विवाद की घटना की आड़ लेकर जानबूझकर कावड़ यात्रा को निशाना बना रहा था। इसका उद्देश्य न केवल यात्रा को बाधित करना था, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर स्थानीय जनता को शासन के खिलाफ उकसाना भी था। भीड़ ने नारेबाजी, गाली-गलौज और उत्तेजक भाषा का प्रयोग करते हुए पहले राजमार्ग को अवरुद्ध किया, फिर देखते ही देखते पुलिस पर हमला कर दिया।

इस दौरान सरकारी संपत्ति को जानबूझकर निशाना बनाया गया — पुलिस बैरियर्स, होर्डिंग्स, गाड़ियाँ और दुकानों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया और आम राहगीरों व व्यापारियों के साथ भी अभद्रता और हिंसा की गई।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी फैल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा और देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा।

फिलहाल, पुलिस द्वारा गहराई से जांच की जा रही है। CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और चश्मदीदों के बयान के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कोई सामान्य कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि एक षड्यंत्र के तहत किया गया हमला है, और इसमें शामिल लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह धार्मिक आस्थाओं की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व एक संगठित योजना के तहत शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं — और यह सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक स्तर की सामाजिक चुनौती बनती जा रही है।

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