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कानपुर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या की गिरफ्तारी: पुलिस ने खोली फर्जी दस्तावेजों की पोल

गहन पूछताछ के बाद साहिल ने स्वीकार किया कि वह म्यांमार का रहने वाला है और बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत आया था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे एक रोहिंग्या शरणार्थी को गिरफ्तार कर एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। बुधवार, 21 मई 2025 को शुक्लागंज के मनोहर नगर में आठ साल से परिवार के साथ रह रहे मोहम्मद साहिल को कानपुर के बड़ा चौराहा से हिरासत में लिया गया। यह व्यक्ति ऑटो चालक के रूप में काम कर रहा था और इसके पास से फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए गए हैं। इस घटना ने पुलिस को उन लोगों की तलाश में जुटने के लिए मजबूर कर दिया है, जिन्होंने इसे संरक्षण और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए।

पुलिस की चेकिंग में खुला राज
बड़ा चौराहा पर जेड स्क्वायर चौकी प्रभारी रोहित शर्मा की टीम बुधवार को वाहनों की नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान ऑटो चालक मोहम्मद साहिल को रोका गया। उसके कागजात मांगने पर उसने आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस दिखाया, लेकिन उसकी टूटी-फूटी हिंदी और संदिग्ध व्यवहार ने पुलिस का ध्यान खींचा। गहन पूछताछ के बाद साहिल ने स्वीकार किया कि वह म्यांमार का रहने वाला है और बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत आया था।

पुलिस ने तुरंत उसे कोतवाली ले जाकर सख्ती से पूछताछ की। इस दौरान उसने बताया कि वह बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में तीन साल रहा, फिर असम होते हुए कानपुर पहुंचा। उसकी बहन और बहनोई पहले से ही शुक्लागंज के मनोहर नगर में रह रहे थे, जिनकी मदद से उसने फर्जी दस्तावेज बनवाए और ऑटो चलाना शुरू किया।

पुलिस की पूछताछ में क्या बोला मोहम्मद साहिल?
मोहम्मद साहिल ने पुलिस को बताया, “मैं मूल रूप से म्यांमार के मंगडो शहर, ग्राम शिद्दर फरा कयंम डेंग का रहने वाला हूं। 2013-14 में मैं अपने परिवार के साथ बांग्लादेश के काक्स बाजार शरणार्थी कैंप पहुंचा। वहां तीन साल रहने के बाद मैं असम आया और फिर कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचा। मेरी बहन ताहिरा बेगम और बहनोई अमीन पहले से ही शुक्लागंज में रह रहे थे। उनकी मदद से मैंने आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया।”

साहिल ने यह भी खुलासा किया कि बांग्लादेश से असम बॉर्डर पार करने के लिए उसने और उसके परिवार ने प्रति व्यक्ति 1200 रुपये दिए थे। कुल छह सदस्यों के लिए 7200 रुपये का भुगतान एक ऑटो चालक को किया गया, जो शरणार्थियों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने में मदद करता था।

पुलिस ने शुक्लागंज में की छापेमारी
पुलिस ने साहिल के बयान के आधार पर शुक्लागंज के मनोहर नगर में उसके घर पर छापा मारा, लेकिन वहां कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं मिला। साहिल की बहन ताहिरा बेगम और बहनोई अमीन मौके पर नहीं मिले। जानकारी के अनुसार, ताहिरा और अमीन 2014 में इसी तरह अवैध रूप से भारत आए थे। पुलिस अब इन दोनों की तलाश में जुट गई है, जो संभवतः फर्जी दस्तावेजों के इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं।

शरणार्थी कैंप के कैसे हैं हालात!
साहिल ने बांग्लादेश के काक्स बाजार शरणार्थी कैंप के बारे में बताया कि वहां लगभग तीन लाख लोग रहते थे। “सुरक्षाकर्मी शरणार्थियों के साथ ज्यादती करते थे। खाना समय पर नहीं मिलता था, और हमें किसी भी काम में जबरन लगा दिया जाता था। जो पैसे कमाए, उसी से भारत आने का रास्ता बनाया,” साहिल ने पुलिस को बताया।

जानिये एसीपी कोतवाली क्या बोले?
एसीपी कोतवाली आशुतोष कुमार ने बताया, “बड़ा चौराहा पर एक रोहिंग्या को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस मिला है। हम यह जांच कर रहे हैं कि बिना वीजा और पासपोर्ट के वह भारत कैसे आया और फर्जी दस्तावेज बनाने में उसकी मदद किसने की।” पुलिस इस मामले में गहन जांच कर रही है और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रयासरत है।

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