गोरखपुर, 19 अप्रैल 2025: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) के पत्रकारिता विभाग में 17 अप्रैल 2025 को दीक्षा भवन में हुई एक घटना ने न केवल छात्रों और शिक्षकों के बीच तनाव पैदा किया, बल्कि स्थानीय समाचार पत्रों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए। इस घटना के बाद प्रतिष्ठित अखबारों द्वारा प्रकाशित खबरों को लेकर छात्रों में आक्रोश है। छात्रों का आरोप है कि इन अखबारों ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए और विश्वविद्यालय प्रशासन या छात्रों का पक्ष जाने बिना एकतरफा और आधी-अधूरी खबरें छापकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।
क्या है पूरा मामला?
17 अप्रैल को पत्रकारिता विभाग के छात्र जब दीक्षा भवन में परीक्षा देने पहुंचे, तो उन्होंने परीक्षा हॉल की स्थिति पर सवाल उठाए। टूटी-फूटी बेंच, गंदगी, और तपती गर्मी में पंखों की कमी जैसी समस्याओं को लेकर छात्रों ने आपत्ति जताई। इस दौरान एक प्रोफेसर ने कथित तौर पर छात्रों को धमकाते हुए कहा कि जिन्हें दिक्कत है, उनके लिए “सोफे और एसी” की व्यवस्था कर दी जाएगी। इतना ही नहीं, एक वरिष्ठ छात्र के साथ बदतमीजी और अनुचित शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे हॉल से बाहर निकालने के लिए मजबूर किया गया। जब अन्य छात्रों ने इसका विरोध किया, तो प्रोफेसर ने धमकी दी कि “इन सबको मैं जानता हूं, इन सबको देख लूंगा।”
इस विवाद में करीब 35 से 40 मिनट तक हंगामा हुआ, जिसके बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों ने मामले को शांत कराया। अंततः परीक्षा पूर्ण रूप से संपन्न हुई। हालांकि, अगले दिन गोरखपुर के प्रमुख अखबारों में इस घटना को लेकर ऐसी खबरें छपीं, जिनमें छात्रों पर बेबुनियादी आरोप लगाए गए और घटना का केवल एक पक्ष प्रस्तुत किया गया।
अखबारों पर एकतरफा पत्रकारिता का आरोप
छात्रों का कहना है कि अखबारों ने न तो विश्वविद्यालय प्रशासन का बयान लिया और न ही छात्रों का पक्ष जाना। एक छात्र ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “खबरों का फैक्ट चेक करना और संपादन एक प्रतिष्ठित अखबार की नैतिक जिम्मेदारी होती है, खासकर विवादास्पद मामलों में। लेकिन इन अखबारों ने पूरी जानकारी इकट्ठा करना भी उचित
निष्पक्ष पत्रकारिता की मांग
छात्रों का कहना है कि एकतरफा खबरों ने न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाई है। इन खबरों के कारण छात्रों के परिजन उनसे घटना के बारे में सवाल कर रहे हैं, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हैं। छात्रों ने मांग की है कि अखबार अपने स्रोतों और रिपोर्टरों से घटना की स्पष्टता मांगें और गलत खबर छापने के लिए माफी मांगें।
विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को परीक्षा के दौरान शांत करा दिया था, लेकिन घटना के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। छात्रों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्पष्टता लानी चाहिए और अखबारों द्वारा फैलाई गई गलत सूचनाओं का खंडन करना चाहिए।
यह घटना न केवल विश्वविद्यालय के माहौल और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब बड़े समाचार पत्र बिना तथ्यों की जांच किए खबरें छापते हैं, तो यह न केवल व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि समाज में गलत सूचनाओं का प्रसार भी करता है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और अखबारों से माफी की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

