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झूठी तस्वीरों और नंबरों के हेराफेरी, मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना में बड़ा घोटाला, माकपा ने उठाई जांच की मांग

मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना में धांधली का आरोप, फ़र्ज़ी फोटो अपलोड कर चयनित की गईं ग्राम पंचायतें, मानकों की अनदेखी कर अफसरों ने मनमाने ढंग से दिया अंक, जिलाधिकारी ने जांच के दिए निर्देश, माकपा ने उठाई आवाज़

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना जनपद में चंद अधिकारियों एवं कर्मियों के हाथ का खिलौना बन गयी है । 5 ग्राम पंचायतों के चयन में शासन द्वारा दिए गए गाइडलाइन,थीम पर आधारित 50 सवालों पर नंबर हासिल करने के लिए कर्मियों ने जमकर मानकों की धज्जियां उड़ाई है ।मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने जिलाधिकारी से मुलाकात करके शिकायत किया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को अपने स्तर से स्वय जांच करने की संस्तुति किया है। मुख्य विकास अधिकारी ने निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच का आश्वासन दिया है।


माकपा द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में आरोप है कि सोशल साइट से फ़ोटो उठाकर अपलोड करके पसंदीदा गांवों का चयन कर लिया गया है जबकि धरातल पर दिख रही सच्चाई व वेबसाइट पर अपलोड फ़ोटो में ज़मीन आसमान का अंतर है।
सनद रहे पिछले वर्षों की भांति वर्ष 2023-24 के पुरस्कार योजना के लिए जनपद में 130 ग्राम पंचायतों के आवेदन प्राप्त हुए थे जिनका भौतिक व अभिलेखीय सत्यापन करने की ज़िम्मेदारी जिला पंचायत राज्य अधिकारी की थी सत्यापन के पश्चात 20 ग्राम पंचायतों की सूची अंतिम चयन हेतु निकाली गई । जिलाधिकारी बस्ती ने शासन द्वारा निर्धारित थीम तथा मानक के आधार पर अंतिम सत्यापन हेतु 7 अधिकारियों में ग्राम पंचायतों को बाँट दिया था सूत्रों का कहना है कि इन अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी में कोताही बरतते हुए अपनी ओर से कोई कार्य ,सत्यापन, अभिलेख का निरीक्षण नहीं किया बल्कि चंद ग्राम पंचायत अधिकारियों के फ़र्ज़ी वाडे से तैयार पत्रावली को ही आधार मानकर पाँच ग्राम पंचायतों का चयन पुरस्कार हेतु कर लिया गया ।


माकपा नेता कामरेड के के तिवारी ने चयनित ग्राम पंचायत ख़ुशहाल गंज,विकास खंड दुबौलिया तहसील हर्रैया में बाल मैत्री शौचालय का निर्माण शुरू हुआ है जबकि वेबसाइट पर फ़र्ज़ी फोटोशॉप से बाल मैत्री शौचालय का फ़ोटो अपलोड कर अंक प्रदान कर दिया गया। अपूर्ण अर्धनिर्मित भवन को आगनबाड़ी केन्द्र दर्शा दिया गया , पानी की टंकी ज़रूर बना दी गई है किंतु अभी न तो सप्लाई के लिए न ही घरों में कोई कनेक्शन दिए गए हैं और न ही टंकी में पानी भरने के बाद सप्लाई का कोई प्रबंध किया गया हैं ।दुखद तो यह है कि जो मैदान क्रीड़ास्थल के लिए है वह परंपरागत रूप से राम लीला सहित अन्य उत्सव के लिए होता है और सीज़न में गन्ने की तौल का केंद्र भी रहता है, हां अपलोड फोटो में साफ सुथरा मदन गोल पोस्ट के साथ है ।जो मौके पर अस्तित्व विहीन है।बच्चे कौन सा खेल खेलते होंगे यह ग्राम पंचायत सचिव, प्रधान व ज़िले के ज़िम्मेदार अधिकारी ही जानते होंगे जिन्होंने अंतिम पुरस्कार चयन के लिए इस गाँव को नामित किया है।


चयनित सकरदहा ग्राम पंचायत में खेल का मैदान, पार्क, ओपन जिम कागजों में ही मात्र दर्शाया है। आंगनबाड़ी केंद्र तथा बाल मैत्री शौचालय न होने के बावजूद अंक प्रदान कर उन्हें चयनित सूची में लाने का आरोप है ।
ग्राम पंचायत बहादुरपुर विकास खंड की बेइली ग्राम पंचायत में स्थलीय सत्यापन किया तो पता चला ओवर हैड टैंक मात्र बना दिया गया है न तो पानी की सप्लाई लाइन पूर्ण किया गया है न ही कनेक्शन । इसी प्रकार आंगनबाड़ी केंद्र के दो भवनों में एक में बाल मैत्री शौचालय निर्मिति ही नहीं किये है पुराने भवन में जो भी जीर्णशीर्ण है उसमें टूटा फूटा शौचालय है जो उपयोग में नहीं है फ़र्ज़ी फ़ोटो लगाकर यहाँ भी अंक दिए गए हैं। यही हाल खेल का मैदान, पार्क, ओपन जिम का है जो निर्मित ही नहीं है उस पर भी अंक प्रदान किया है इतना ही नहीं बल्कि ग्राम पंचायत में कूड़ा कचरा, जल जमाव, गंदगी आदि के बावजूद स्वच्छता का अंक प्रदान किया गया है इसी प्रकार पथ प्रकाश में 50 से कम संख्या होने के बावजूद ग़लत तरीक़े से अंक दिए गए हैं।


रामनगर के चयनित ग्राम पंचायत बेलगड़ी में भी मनमानी से खेल का मैदान, पार्क, जिम, आगनबाड़ी भवन, बाल-मैत्री शौचालय, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम उपलब्ध न होने के बावजूद अंक प्रदान किए गए हैं यही हाल अन्य सुविधाओं का है जो बदहाल पड़े होने के बावजूद अंक दिए गए हैं।


इसी प्रकार बस्ती सदर विकासखंड के महसौ ग्राम पंचायत में भी कई मानकों का उल्लंघन करते हुए अंक प्रदान किए गए हैं ।
माकपा नेता कामरेड के के तिवारी का कहना है कि बहुत से ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं जिनका काम मानक के अनुरूप चयनित ग्राम पंचायतों की अपेक्षा बेहतर तरीक़े से हुए हैं किन्तु ग्राम पंचायत अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के चलते आवेदन में नहीं आ सकी और अगर आयी भी तो मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना में व्यापक धाँधली करने वाले गिरोह का शिकार हो गई। विभिन्न चरणों में मॉनिटर करने वाले अधिकारियों ने भी अपनी जवाबदेही उदासीनता के चलते पूरा नहीं किया ,नीचे से जो भी फाइल आई अपने स्तर से मात्र आगे बढ़ाने का काम किया।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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