नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड अख़बार से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस कार्रवाई के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।
ईडी की विशेष अदालत में 9 अप्रैल को दाखिल इस चार्जशीट पर विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने संज्ञान लेते हुए 25 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की है। ईडी की इस चार्जशीट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा और राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुमन दुबे को भी सह-आरोपी बनाया गया है।
ईडी की जांच में यह आरोप लगाया गया है कि यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की अरबों की संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से नियंत्रण स्थापित किया। एजेंसी ने इसी महीने एजेएल की करीब 661 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से ‘बदले की राजनीति’ बताया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि “यह सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना है। जिस संपत्ति को लेकर मामला दर्ज है, वह वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में है और किसी भी तरह की अवैधता इसमें नहीं है। असल में यह विपक्ष की आवाज को दबाने का एक नया तरीका है।”
अब सभी की निगाहें 25 अप्रैल को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से इस बहुचर्चित केस में कानूनी लड़ाई का अगला चरण शुरू होगा।

