वाराणसी, 15 अप्रैल — काशी की ज़मीन पर हाल ही में हुए छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने न केवल शहर को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। सोमवार को सीपीआईएम जिला कार्यालय में आयोजित सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों, जन संगठनों और सामाजिक संगठनों ने एक स्वर में इस नृशंस घटना की कड़ी निंदा करते हुए विरोध आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया।
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि नदेसर मोहल्ले की एक छात्रा के साथ हुआ गैंगरेप न केवल मानवता को शर्मसार करने वाला है, बल्कि यह काशी जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शहर पर एक बदनुमा दाग है। वक्ताओं ने कहा कि हालिया घटनाएं कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक भयावह सिलसिला बन चुकी हैं — चाहे वह बीएचयू परिसर हो या शहर के छात्रावास।
“भाजपा सरकार की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत”
बैठक में यह आरोप खुलकर लगाए गए कि इन बलात्कारों के पीछे सत्ता पक्ष के प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता रही है, और भाजपा सरकार के दबाव में पुलिस प्रशासन ने अब तक आरोपियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई नहीं की है। गैंगरेप के आरोपी अब भी खुले घूम रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सत्ता के संरक्षण में अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है।
सर्वदलीय मंच ने मांग की कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और किसी को भी छोड़ा न जाए। इसके अलावा, शहर में बेधड़क चल रहे अवैध बार, हुक्का बार और पब पर भी सवाल उठे, जहां ऐसी घटनाओं की जमीन तैयार होती है। इन पर रोक लगाने और लाइसेंस रहित बारों को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
17 अप्रैल को होगा बड़ा प्रतिरोध आंदोलन
बैठक में निर्णय लिया गया कि 17 अप्रैल को एक विस्तारित बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें सभी दल, संगठन और सामाजिक संस्थाएं भाग लेंगी और महिला हिंसा के खिलाफ प्रतिरोध की रणनीति तय की जाएगी। यह भी ऐलान किया गया कि इस मुद्दे को अब सड़कों पर लाया जाएगा और जनदबाव बनाकर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया जाएगा।
बैठक में शामिल प्रमुख नेता व संगठन
इस सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, सीपीआईएम, सीपीआई, सीपीआई एमएल, फॉरवर्ड ब्लॉक, सामाजिक इंसाफ मोर्चा, सीटू, बुनकर दस्तकार मोर्चा सहित कई संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता नंदलाल पटेल ने की।
प्रमुख भागीदारों में डॉ. हीरालाल यादव, राघवेंद्र चौबे, अनिल कुमार सिंह, मिठाई लाल, शिवनाथ यादव, डॉ. महफूज आलम एडवोकेट, संजय भट्टाचार्य, आर.डी. सिंह विप्लवी, प्रमोद वर्मा, किशनलाल यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।
बैठक के अंत में समाजवादी नेता माथुर के निधन पर शोक प्रस्ताव भी पारित किया गया।

