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ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ़ का ऐलान: भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा इसका कितना असर?

ट्रंप के नए टैरिफ़ से वैश्विक व्यापार पर असर, भारत के फार्मा और सेमीकंडक्टर उद्योग को राहत, लेकिन डायमंड, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल सेक्टर को झटका।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लागू करने की घोषणा की है, जिसके बाद वैश्विक शेयर बाज़ारों में हलचल मच गई है। इस फैसले की वजह से कई देशों के शेयर बाज़ारों पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है, और विश्व भर के नेता ट्रंप की इस नीति की आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप ने ऑटोमोबाइल उद्योग जैसे क्षेत्रों पर 25% टैरिफ़ लगाया है, जिसका मतलब है कि अमेरिका को ऑटो निर्यात करने वाले देशों को अब भारी शुल्क चुकाना होगा। इसके अलावा कई अन्य उत्पादों पर भी टैरिफ़ लागू किया गया है, हालांकि कुछ ज़रूरी वस्तुओं और रणनीतिक उद्योगों को इससे छूट दी गई है।

भारत को राहत, लेकिन चुनौतियां भी

ट्रंप के इस टैरिफ़ से भारत को मिला-जुला प्रभाव देखने को मिलेगा। खास तौर पर भारत के फार्मा उद्योग के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि जेनेरिक दवाओं को टैरिफ़ से बाहर रखा गया है। भारत हर साल अमेरिका को लगभग 12.7 अरब डॉलर की दवाइयां निर्यात करता है, और इस छूट से भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी बाज़ार पर निर्भर इस उद्योग को टैरिफ़ का डर सता रहा था, लेकिन इन्सुलिन, विटामिन (ए, बी1, बी2, बी5, बी6, बी12, सी, ई), फॉलिक एसिड और निआसिन जैसी दवाओं को छूट मिलने से स्थिति संभली हुई है। हालांकि, भारत को अमेरिका से आयात होने वाली दवाओं पर 10.91% शुल्क देना पड़ता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन बना रहता है।

तांबे और सेमीकंडक्टर को भी छूट

अमेरिका ने तांबे के आयात को टैरिफ़ से मुक्त रखा है, जो वहां के औद्योगिक उपयोग के लिए अहम है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनी रहेगी। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण उत्पादों को भी टैरिफ़ से छूट दी गई है। भारत अमेरिका को 1.68 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर निर्यात करता है, और इस छूट से भारतीय कंपनियों को फायदा होगा। फोटोसेन्सिटिव सेमीकंडक्टर डिवाइस, ट्रांजिस्टर, एलईडी और डायोड के पार्ट्स जैसे उत्पाद भी इस सूची में शामिल हैं।

लकड़ी, ऊर्जा और खनिजों पर राहत

लकड़ी और उससे जुड़े उत्पादों को टैरिफ़ से बाहर रखा गया है। ऊर्जा उत्पादन के लिए ज़रूरी खनिजों, जैसे जिंक, प्लेटिनम, पैलेडियम और रोडियम को भी छूट दी गई है। इसके अलावा, सोना, चांदी, ट्रांजिस्टर, पेपरबोर्ड, प्रिंटेड किताबें, समाचार पत्र, और प्रिंट विज्ञापन सामग्री जैसे उत्पादों पर भी टैरिफ़ नहीं लगेगा। ट्रंप का यह कदम व्यापार प्रतिबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है।

इन उद्योगों पर पड़ेगा टैरिफ़ का असर

हालांकि, कई उत्पाद टैरिफ़ से नहीं बच सके। भारत की डायमंड और ज्वेलरी इंडस्ट्री, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करती है, पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऑटोमोबाइल और कार एसेसरीज़ पर भी टैरिफ़ लगाया गया है। ट्रंप ने पहले भी भारत द्वारा अमेरिकी कारों पर 70% टैरिफ़ लगाने की शिकायत की थी, और अब जवाबी कार्रवाई के तौर पर यह कदम उठाया गया है।

रिफाइंड पेट्रोलियम पर भी टैरिफ़ का ऐलान हुआ है। 2023 में अमेरिका ने भारत को 14 अरब डॉलर का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किया था, जबकि भारत अमेरिका को रिफाइंड तेल बेचता है। इसके अलावा, रेडीमेड गारमेंट्स (4.93 अरब डॉलर का निर्यात करता है ) और ब्रॉडकास्टिंग/टेलिकॉम उपकरण (2024 में 6.5 अरब डॉलर का निर्यात करता है) पर भी टैरिफ़ लगेगा। भारत में टेलिकॉम उद्योग, जो 17,800 से अधिक रोज़गार पैदा करता है, पर भी इसका असर पड़ सकता है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और भविष्य

ट्रंप के इस फैसले ने वैश्विक व्यापार में नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ देश इसे संरक्षणवादी नीति बता रहे हैं, वहीं अमेरिका का कहना है कि यह रेसिप्रोकल टैरिफ़ व्यापार को निष्पक्ष बनाने के लिए ज़रूरी है। भारत जैसे देशों के लिए यह नीति अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आई है। आने वाले दिनों में इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर साफ़ तौर पर दिखेगा।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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