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वक़्फ़ संशोधन बिल 2024: संसद में बहस और राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी

वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024: संसद में सियासी जंग, समर्थन और विरोध की पूरी कहानी

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024 को लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक पर आठ घंटे तक बहस की जाएगी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे।

मंगलवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में इस बिल के खिलाफ संयुक्त विरोध करने का फैसला किया गया, जबकि एनडीए ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। इस विधेयक के समर्थन और विरोध में कई दलीलें दी जा रही हैं। आइए, इस बहस से जुड़ी दस प्रमुख बातों को विस्तार से समझते हैं।

1. लोकसभा और राज्यसभा में संख्या बल

• मौजूदा लोकसभा में कुल 542 सदस्य हैं।

• एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जोकि बहुमत (272) से अधिक है।

• इंडिया गठबंधन के पास 234 सांसद हैं।

• राज्यसभा में एनडीए के पास 126 सांसद हैं, जो बहुमत (118) से ज्यादा है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि संसद में संख्याबल के हिसाब से यह बिल आसानी से पास हो सकता है।

2. इस बिल के समर्थन में कौन है?

• एनडीए सरकार के अलावा

• नीतीश कुमार की जेडीयू

• चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी

• शिवसेना (शिंदे गुट)

• लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास गुट)

इन सभी दलों ने सरकार का समर्थन करने के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है।

3. टीडीपी का समर्थन, लेकिन कुछ शर्तों के साथ

• टीडीपी ने बिल का समर्थन किया है लेकिन कुछ बदलावों की मांग रखी है।

• उन्होंने बिल को पीछे की तारीख से लागू न करने की अपील की है।

• टीडीपी के 16 सांसद और जेडीयू के 12 सांसद हैं, जो बीजेपी के 240 सांसदों के साथ मिलकर बिल पास कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।

• हालांकि, दोनों दलों का मुस्लिम वोटबैंक पर प्रभाव है, इसलिए वे सावधानी बरत रहे हैं।

4. असदुद्दीन ओवैसी की अपील

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने टीडीपी, जेडीयू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी से इस बिल का विरोध करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ है।

5. इस बिल का विरोध कौन कर रहा है?

• इंडिया गठबंधन ने बिल के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार की।

• कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे “असंवैधानिक और विभाजनकारी” बताया।

• समाजवादी पार्टी, जिसके 37 सांसद हैं, ने व्हिप जारी कर बिल के विरोध में मतदान करने को कहा।

• टीएमसी, आप, डीएमके, आरजेडी, एनसीपी (शरद पवार गुट) आदि ने इस विधेयक का विरोध किया।

6. ग़ैर-एनडीए और ग़ैर-इंडिया गठबंधन वाले दलों की स्थिति

• एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी) और पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इस बिल का विरोध किया है।

• 22 मार्च को जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसमें पप्पू यादव भी शामिल हुए थे।

7. निर्दलीय सांसदों की भूमिका

लोकसभा में 7 निर्दलीय सांसद हैं:

• पप्पू यादव (पूर्णिया, बिहार) – बिल का विरोध

• प्रकाशबाबू पाटिल (सांगली, महाराष्ट्र) – कांग्रेस के नजदीक

• अमृतपाल सिंह (पंजाब) – जेल में बंद

• अब्दुल रशीद शेख (बारामूला, कश्मीर) – जेल में बंद

• सरबजीत सिंह खालसा (फरीदकोट, पंजाब)

• पटेल उमेश भाई बाबूभाई (दमन व दीव)

• मोहम्मद हनीफा (लद्दाख)

इनमें से कई सांसद जेल में हैं या उन्होंने अभी तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है।

8. जो किसी गठबंधन में नहीं

• बसपा (मायावती), बीजद (नवीन पटनायक) – लोकसभा में कोई सांसद नहीं।

• वाईएसआरसीपी (आंध्र प्रदेश, 4 सांसद) – स्वतंत्र दल

• आज़ाद समाज पार्टी (चंद्रशेखर आज़ाद) – 1 सांसद

• शिअद (हरसिमरत कौर बादल) – 1 सांसद

• भारत आदिवासी पार्टी (राजकुमार रोत, राजस्थान) – कांग्रेस के करीब

• ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (मिज़ोरम) – 1 सांसद

• वॉइस ऑफ़ द पीपुल पार्टी (मेघालय) – 1 सांसद

इन पार्टियों के फैसले से बिल के पारित होने पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक संकेत जरूर देंगे।

9. बिल पहली बार कब पेश हुआ था?

• अगस्त 2024 में यह बिल पहली बार लोकसभा में पेश हुआ।

• इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया था।

• समिति ने इसमें कुछ बदलाव की सिफारिशें दी थीं, जिन्हें अब बिल में शामिल किया गया है।

10. इस बिल का विरोध क्यों हो रहा है?

• वक़्फ़ बोर्डों में ग़ैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्यता

• कलेक्टर को वक़्फ़ संपत्तियों पर अंतिम निर्णय का अधिकार

• सरकार के अधिकारों में वृद्धि

• वक़्फ़ बोर्डों से सर्वेक्षण का अधिकार छीनकर जिला प्रशासन को देना

• सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल में दो महिला सदस्यों को अनिवार्य बनाना

• शिया, सुन्नी के अलावा बोहरा और आगाख़ानी समुदायों के लिए अलग बोर्ड

वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024 पर संसद में गरमागरम बहस हो रही है। संख्याबल के आधार पर एनडीए को बढ़त है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह बिल विवादित बनता जा रहा है। विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बता रहा है, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता लाने वाला सुधार बता रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह बिल किन बदलावों के साथ पास होता है और इसका राजनीतिक असर क्या पड़ता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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