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शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बस्ती पहुँचे वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह

शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के शहादत दिवस पर प्रेस क्लब में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हे नमन् किया गया। समकालीन दुनिया- मानवीय मूल्यों का भविष्य पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने एकल व्याख्यान दिया।

बस्ती। 23 मार्च। शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के शहादत दिवस पर प्रेस क्लब में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हे नमन् किया गया। समकालीन दुनिया- मानवीय मूल्यों का भविष्य पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने एकल व्याख्यान दिया। पुरातनकाल से लेकर आधुनिक युग तक के मानव जाति के विकास यात्रा, साम्राज्य और राष्ट्र की स्थापना, पत्रकारिता के पुरातन और वर्तमान परिवेश पर तार्किक ढंग से विचार रखे। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के सफर, टेलीविजन युग की पत्रकारिता के दौर में टीआरपी की होड़ में पत्रकारिता के स्तर में गिरावट, सोशल मीडिया की अच्छाइयों और खतरों के प्रति आगाह किया।
कहा कि मानव जाति का इतिहास 20 लाख वर्ष पुराना है। प्रमाणों में मनुष्यता बहुत पीछे है। हमसे मिलता जुलता प्राणी पाषाण युग में पाया गया, जो मनुष्य है वे स्तनपाई जीव है। प्रमाणों में 20 लाख पहले हमारा व्यवहार भी जंगली जानवरों जैसा था। बाद में धीरे- धीरे सभ्यता का विकास हुआ।
पत्रकारिता की चर्चा करते हुए कहा कि इसका विकास लगभग तीन सौ पूर्व रोम से हुआ। 18वीं शदी में जर्मन ने प्रिंटिंग प्रेस का निर्माण किया। श्वेत श्याम अखबार छपने शुरू हुए। सबसे पहले यूरोप में अखबार छपना शुरू हुआ। 18वीं सदी में एक अंग्रेज ने भारत में अखबार की शुरूआत की। यह पत्रकारिता की ताकत ही रही कि भारत में एक अंग्रेज द्वारा शुरू किये गये अखबार में ब्रिटिस हुकुमत के ही खिलाफ लिखा जाता रहा। इसके बाद रंगीन अखबारों की शुरूआत हुई। लागत ज्यादा हुई, पूंजी बढ़ी तो अखबार विज्ञापनों पर निर्भर हो गए, इस कारण अखबार सरकार की गलत नीतियों के विरोध की जगह सरकार की ही बात करने लगे। आम जन का पक्ष धीरे- धीरे अखबार के पन्नों से गायब होने लगा। टेलीविजन युग आया, उस पर समाचार आने लगे तो उसका स्वरूप् और विकृत हो गया। एक टीवी चैनल चलाने में जब करीब पांच सौ करोड़ रूपए की लागत आई तो टीवी चैनल भी सरकारी विज्ञापनों पर निर्भर हो गए और वे सरकार की गलत नीतियों को आइना दिखाने की जगह उनके सुर में सुर मिलाने लगे। टीआरपी की होड़ में खबरों का सच भी दब गया। उदाहरण देते हुए कहा कि एक्टर सुशांत सिंह की मौत मामले में टीआरपी की होड़ में तथ्यों की अनदेखी कर कई माह तक खबरे चलीं जिसमें एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को खलनायिका बना दिया गया। अब सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाकर रिया चक्रवर्ती को निर्दोष बताया है। कहा कि पहले पत्रकारिता जनता की तरफ से सरकार से वाल पूछती थी, लेकिन अब हालात बदल गए है। पत्रकारिता अब जनता की ओर से सरकार से सवाल नहीं पूछती बल्कि सरकार की ओर से जनता से सवाल करती है।
आयोजक मंडल की ओर से प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने स्वागत भाष दिया। आभार ज्ञापन कार्यक्रम वरिष्ठ पत्रकार पुनीत दत्त ओझा ने किया। पत्रकार समूह की ओर से पुनीत दत्त ओझा, डीवाईएफवाई की ओर से जिलाध्यक्ष शिवच रण निषाद संयोजक रहे। आयोजक मंडल में विनोद कुमार उपाध्याय, रघुवंशमणि, केके त्रिपाठी, संदीप गोयल, डॉ. मारूति शुक्ला, सज्जाद रिजवी, कमलेश सिंह, हिफजुर्रहमान, वसीम अहमद, बबुन्दर यादव, अशर्फी लाल, शेषमणि, वेदिक द्विवेदी, विदेश यादव आदि शामिल रहे

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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