लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और पंजाब पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर कौशांबी जिले से बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आतंकी की पहचान पंजाब के अमृतसर जिले के रामदास क्षेत्र के कुर्लियान गांव निवासी लजर मसीह के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि लजर मसीह हाल ही में संपन्न प्रयागराज महाकुंभ में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहा था।
ISI से था सीधा संपर्क, ड्रोन से मिल रहे थे हथियार
उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकी की गिरफ्तारी को लेकर कई अहम खुलासे किए। उन्होंने बताया कि लजर मसीह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सीधे संपर्क में था। पाकिस्तान में बैठे उसके हैंडलर उसे ड्रोन के जरिए गोला-बारूद और हथियार भेज रहे थे। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं ताकि आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।
प्रयागराज महाकुंभ में हमला करने की थी साजिश
डीजीपी के मुताबिक, लजर मसीह प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कोई बड़ी आतंकी वारदात अंजाम देना चाहता था, जिसके बाद वह पुर्तगाल भागने की फिराक में था। हालांकि, यूपी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के चलते उसकी यह साजिश नाकाम हो गई। जांच में सामने आया है कि महाकुंभ के दौरान लजर कौशांबी, लखनऊ और कानपुर में सक्रिय था और अपने नेटवर्क को मजबूत करने में जुटा था।
महाकुंभ से पहले से थी खुफिया एजेंसियों को सूचना
डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि महाकुंभ से पहले ही कुछ लोगों द्वारा गड़बड़ी फैलाने की सूचना मिली थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए बब्बर खालसा और ISI से जुड़े संदिग्धों पर निगरानी बढ़ा दी थी। इसी कड़ी में लजर मसीह की गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया।
यूपी में खालिस्तानी साजिशें नाकाम
गौरतलब है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में खालिस्तानी आतंकियों की गतिविधियों पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी। 23 दिसंबर 2024 को पीलीभीत में तीन आतंकवादी मारे गए थे, जिनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भी प्रयागराज महाकुंभ में आतंकी हमले की धमकी दी थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी के चलते आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। फिलहाल, गिरफ्तार आतंकी लजर मसीह से पूछताछ जारी है, और सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।

