बस्ती: बजट 2025 सरकार की वाहवाही तक सीमित रह गया है। जहां एक तरफ 12 लाख रुपये तक की आय वालों को टैक्स फ्री कर राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण और शहरी विकास सहित स्वास्थ्य क्षेत्रों में भारी कटौती से असंतोष बढ़ गया है।
गांधियन विचारक राकेश पांडेय ने बजट को लेकर चिंता जताई और कहा कि सरकार ने शिक्षा, ग्रामीण विकास और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में बजट कम कर दिया है, जिससे आम जनता को नुकसान होगा। शिक्षा बजट को पिछले साल के 1.25 लाख करोड़ रुपये से घटाकर इस साल 1.14 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो शिक्षा क्षेत्र के लिए झटका साबित होगा।
इसी तरह, ग्रामीण विकास बजट को पिछले साल के 2.66 लाख करोड़ से घटाकर 1.90 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। कृषि क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, उसके बजट में भी कमी आई है। पिछले साल 1.52 लाख करोड़ रुपये का आवंटन था, जबकि इस बार केवल 1.40 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
शहरी विकास, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे अहम क्षेत्रों को भी बजट में तवज्जो नहीं दी गई। बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस ऐलान नहीं किया। इस बजट का एकमात्र फोकस 12 लाख रुपये तक की आय वालों को टैक्स में छूट देना रहा।
गांधियन विचारक राकेश पांडेय ने कहा कि जनता को उम्मीद थी कि बजट 2025 में गरीबों, बेरोजगारों और किसानों के लिए राहत दी जाएगी, लेकिन सरकार ने इस बार भी उन्हें निराश किया है।

