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प्राविधिक शिक्षा विभाग प्रमोशन घोटाला: पल्लवी पटेल ने मुख्यमंत्री योगी से शिकायत कर की एसआईटी जांच की मांग

समाजवादी पार्टी की विधायक पल्लवी पटेल जो कि विभागीय मंत्री आशीष पटेल की पत्नी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की सगी बहन और डॉ सोने लाल पटेल की पुत्री है ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री योगी से शिकायत करते हुए एसआईटी जांच की मांग किया

प्राविधिक शिक्षा विभाग में विभागाध्यक्ष के पदों पर विभागीय पदोन्नति में भ्रष्टाचार के आरोप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्राविधिक शिक्षा विभाग के भाजपा के सहयोगी अपना दल के आशीष पटेल पर अनियमितता बरतने और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है।बौखलाए अपना दल ने लखनऊ में कार्यकर्ताओं,पदाधिकारियों और समर्थकों की बड़ी रैली कर शक्ति प्रदर्शन किया है।केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल तथा प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल सफाई देने ,आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर दवाब बनाते नजर आए।इससे पहले भी मंत्री अपने ही सरकार के सूचना निदेशक सहित उप्र एसटीएफ पर आरोप लगा चुके है।
प्रकरण
प्राविधिक शिक्षा विभाग के अधीन चार यूनिवर्सिटी सहित 14 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज(पॉलिटेक्निक) आते है। विवादित मामला इन्हीं पॉलिटेक्निक में विभागाध्यक्षों के पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है।मंत्री पर आरोप है कि विभागाध्यक्षों की नियुक्तियों में जानबूझ कर तय शुदा नियमावली और मानकों का उल्लंघन करते हुए रिश्वत लेते हुए 250 पदों पर डीपीसी के जरिए प्रमोशन कर पदोन्नत कर दिया गया।
आश्चर्य जनक तो यह है कि सबसे पहले भाजपा के ही विधायक देवेंद्र सिंह लोधी ने मुख्यमंत्री से प्रोन्नति प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की शिकायत किया था। चंद महीने बाद ही दो और भाजपा विधायकों पलटू राम और मीनाक्षी सिंह ने मुख्यमंत्री से माननीय न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए विभागाध्यक्ष के पद पर सीधी भर्ती(उप्र लोकसेवा आयोग के द्वारा) न करा कर अयोग्य शिक्षकों को विभागीय अध्यक्ष के पद पर प्रोन्नति किए जाने की शिकायत किया था। दोनों विधायकों ने प्रोन्नति में अनियमितता बरतने के लिए प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपए वसूली करने का आरोप लगाते हुए शिकायत किया था।
समाजवादी पार्टी की विधायक पल्लवी पटेल जो कि विभागीय मंत्री आशीष पटेल की पत्नी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की सगी बहन और डॉ सोने लाल पटेल की पुत्री है ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री योगी से शिकायत करते हुए एसआईटी जांच की मांग किया।
सपा विधायकपल्लवी पटेल ने एक कदम आगे बढ़ते हुए विधान सभा के शीत कालीन सत्र में विधान सभा में उठाने की कोशिश किया किंतु विधान सभा अध्यक्ष द्वारा समय नहीं मिला।जिससे आक्रोशित विधायक पल्लवी पटेल ने गांधी प्रतिमा के सामने धरना भी दिया था।सपा विधायक का अपनी ही पार्टी में अकेला पड़ जाना आश्चर्य जनक था। पल्लवी पटेल ने उप्र की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात कर न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करते विभागाध्यक्ष के पद पर सीधी भर्ती न कर प्रोन्नत किए जाने और रिश्वत लेकर अयोग्य शिक्षकों को नियुक्त करने की जानकारी देते हुए जांच और कार्यवाही की मांग किया।
प्रोन्नति में घोटाला के मामले के जोर पकड़ने पर खिन्न विभागीय मंत्री अपना दल के आशीष पटेल ने मात्र अपनी साली पल्लवी पटेल पर राजनैतिक और निजी आरोपों की झड़ी लगा दिया,पर उससे पूर्व ही भाजपा विधायकों के आरोपों पर चुप्पी साध गए। उन्होंने पोस्ट लिखा कि ईमानदारी के लिए प्रख्यात आईएएस के नेतृत्व में बनी प्रोन्नति समिति ने पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से कार्य किया है,लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है। इसके साथ ही उन्होंने अपने एक्स प्लेटफार्म से डीपीसी के माध्यम से 177 पद भरे जाने की जानकारी देते हुए बताया कि आरक्षण की प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए 39 सामान्य,78 पिछड़े वर्ग,58 अनुसूचित जाति तथा 2 पद जनजाति के हिस्से में गया है।इसी प्रकार तीन यूनिवर्सिटी और 14 इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपलों के आंकड़े थे।
इतने पर भी मामला शांत न होने पर उन्होंने अपने ही सरकार के सूचना निदेशक शिशिर सिंह और उप्र एसटीएफ पर भी भरी सभा में साजिश,खाद्यंत्र रचने तक का आरोप लगाया।
घटना क्रम के बिगड़ते देख मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और केंद्र में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इनको सपत्नीक बुलाया और लंबी वार्ता किया।
पल्लवी पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीपीसी के लिए माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन के बावजूद डीपीसी कैसे? यूपीएससी से नियुक्ति पर आपत्ति क्यों? अगर आपत्ति थी तो एक ही प्रदेश में मुख्यमंत्री के परिक्षेत्र गोरखपुर में यूपीएससी से नियुक्तियां क्यों? बाकी पूरे प्रदेश में डीपीसी क्यों?
जो भी हो आरोप गंभीर है ,कई विधायकों की ओर से लगाए गए है,प्रकरण पर राज्यपाल महोदया के अगले कदम का इंतजार है। इस बीच भाजपा के दूसरे सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष का कहना है कि हमारी ओर के किसी विभीषण का कार्य है। विभिषण तो लंका के ही थे रावण राज में ।

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