जनपद बस्ती के विकास खण्ड दुबौलिया स्थित ग्राम पंचायत शुकुलपुरा में कोटे को लेकर चल रहे विवाद ने एक नया मोड़ लिया, जब आज एक खुली बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में ADO पंचायत संजय श्रीवास्तव, ग्राम प्रधान बेचनराम, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत के लोग शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था, जिसमें कोटे को लेकर कुछ विवाद उत्पन्न हो गया था।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान जीतेंद्र शुक्ल और गंगा प्रसाद तिवारी ने कोटे के लिए पर्चा भरा था। जैसे ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, दोनों पक्षों के समर्थक पंचायत भवन और चुनाव स्थल पर बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसमें EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सामान्य कोटे के अंतर्गत चुनाव हो रहा था, और इसके लिए चुनाव के नियम बहुत स्पष्ट थे।

चुनाव के नियमों के अनुसार, प्रत्येक प्रत्याशी की उम्र 18 वर्ष से ऊपर होनी चाहिए और वह व्यक्ति EWS सामान्य कोटे का हिस्सा हो। इसके साथ ही मतदान करने वाले सभी व्यक्ति का आधार कार्ड मान्यता प्राप्त दस्तावेज़ होगा और उसकी उम्र 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। चुनाव के दौरान, नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पंजीकरण और उपस्थिति रजिस्टर पर भी गहरी निगाह रखी जा रही थी।
इस बीच, गंगा प्रसाद तिवारी ने चुनाव के दौरान एक गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना था कि जितेंद्र शुक्ल के समर्थक कुछ बाहरी लोग थे, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। उन्होंने यह आरोप लगाया कि यह लोग चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता पैदा कर रहे थे। जब ग्राम प्रधान और चुनाव अधिकारी ने गंगा प्रसाद तिवारी के आरोपों की जांच करने की पेशकश की, तो वह आरोपों को लेकर पीछे हटते हुए नजर आए। गंगा प्रसाद ने इस दौरान उपस्थिति दर्ज करने वाले रजिस्टर को भी छीना, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

ग्राम प्रधान और चुनाव अधिकारी द्वारा स्थिति को संभालने की कोशिश की गई, लेकिन गंगा प्रसाद तिवारी की ओर से विरोध जारी रहा। इसके बाद, पंचायत में मौजूद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया। पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया और चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्वक जारी रखने की कोशिश की।
चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता हुआ दिखाई दिया। जितेंद्र शुक्ल के समर्थक इसे एक सामान्य राजनीतिक विवाद मान रहे थे, जबकि गंगा प्रसाद तिवारी के समर्थक इसे चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का परिणाम मानते हुए आरोप लगा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, चुनाव अधिकारी और पुलिस प्रशासन ने पूरी सतर्कता से मामले को संभालने का प्रयास किया।

चुनाव प्रक्रिया अभी भी जारी थी, और यह साफ था कि दोनों पक्षों के बीच तनातनी बढ़ती जा रही थी। चुनाव के परिणाम की घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस विवाद का हल कैसे निकलेगा। फिलहाल, चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन मामले को शांतिपूर्वक निपटाने की कोशिश में लगे हैं।
चुनाव के दौरान हुए इस विवाद ने शुकुलपुरा ग्राम पंचायत के चुनावों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर चुनाव अधिकारी और पुलिस प्रशासन पूरी कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के संपन्न हो, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों के समर्थक इस विवाद को लेकर अपनी-अपनी ओर से दलीलें पेश कर रहे हैं। चुनाव के नियमों का उल्लंघन होने की संभावना और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इस विवाद का कैसे समाधान करता है।
अंत में, चुनाव परिणाम का इंतजार किया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोटे को लेकर चल रहे विवाद का क्या हल निकला है। इस विवाद ने ग्राम पंचायत शुकुलपुरा में राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है, और आगामी दिनों में इस विवाद का राजनीतिक असर भी नजर आ सकता है।

