बस्ती।
कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रभात पांडेय की मौत की न्यायिक जांच की मांग की। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शास्त्री चौक से नारेबाजी करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
क्या है मामला?
जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र पांडेय ज्ञानू ने बताया कि 18 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार की उदासीनता के खिलाफ आंदोलन का आह्वान किया था। इस दौरान लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रभात पांडेय की कथित रूप से पुलिस बर्बरता के कारण मौत हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश सरकार जनता के बुनियादी मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं को अनदेखा कर रही है।
प्रमुख मुद्दे
जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार बेरोजगारी, महंगाई, किसान और नौजवानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि, “सरकार सांप्रदायिक मुद्दों में जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। हर वर्ग परेशान है, और सरकार गहरी नींद में सो रही है।”
ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
- प्रभात पांडेय की मौत की न्यायिक जांच।
- दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई।
- जनहित के मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता:
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें सुरेंद्र मिश्रा, अवधेश सिंह, संजीव त्रिपाठी, आशुतोष पांडेय (एडवोकेट), गिरजेश पाल, साधूसरन आर्य, डॉ. आलोक रंजन वर्मा, अनिल कुमार भारती, डॉ. शीला शर्मा, शकुंतला देवी, नर्वदेश्वर शुक्ल, शौकत अली नन्हू, सूर्यमणि पांडेय, जितेंद्र चौधरी, शब्बीर अहमद, डीएन शास्त्री, लक्ष्मी यादव, अतीउल्लाह सिद्दीकी, बृजेश कुमार, रामबचन भारती और अन्य प्रमुख रूप से शामिल रहे।
आंदोलन को लेकर चेतावनी:
कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता न्याय के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन सरकार के खिलाफ जनता की आवाज को उठाने का प्रयास है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और न्यायिक जांच की मांग को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।

