बस्ती: केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति दिए गए बयान को लेकर देशभर में आक्रोश का माहौल है। शुक्रवार को बस्ती में दलित समाज के प्रमुख समाजसेवी उदयभान के नेतृत्व में दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के अनेक संगठनों ने संयुक्त रूप से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बाबा साहब के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने वाले गृह मंत्री अमित शाह को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।

बाबा साहब को महामानव बताया
ज्ञापन सौंपने के बाद उदयभान ने कहा, “बाबा साहब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि महामानव हैं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देशभर में उनकी प्रतिमाएं स्थापित हैं और उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है। भाजपा कभी बाबा साहब के सिद्धांतों को नहीं मानती रही। गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में थोड़ी भी नैतिकता है, तो उन्हें अमित शाह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए। अन्यथा, बाबा साहब के करोड़ों अनुयायी कभी भाजपा को माफ नहीं करेंगे।”
प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी और ज्ञापन
शुक्रवार को दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के संगठनों के पदाधिकारी और नेता महान संत गाडगे की प्रतिमा पर पहुंचे और उनके परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें नमन किया। इसके बाद, हाथों में बाबा साहब का चित्र लिए नारे लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च किया। जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना ज्ञापन सौंपा।

इस प्रदर्शन में साधू शरण आर्य, दिवान चंद पटेल, जे.पी. राव, रामशंकर निराला, शिव कुमार, गौरीशंकर, हरीश, राम अनुज भाष्कर, शिवराम कन्नौजिया, बनवारीलाल कन्नौजिया और कमलेश सचान समेत कई प्रमुख लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा, “बाबा साहब का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक ऐसे महामानव का अपमान है, जिन्होंने सदियों से सताए गए और उपेक्षित समाज को आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया। शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो का उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है। उनका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।”
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख नाम
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से मो. रफीक खां, बुद्धि प्रकाश, राम प्रसाद आर्य, कृपाशंकर गौतम, अनिल आजाद, अमित कुमार, राम कुमार, शिव गणेश, सोनू राव, अश्विनी कुमार, संदीप कुमार, विश्राम राव, मोलई प्रसाद, अवधेश सिंह, मंजू पांडेय, आनंद बौद्ध, शशिकांत, मनीष कुमार, माता प्रसाद, परमात्मा प्रसाद चौधरी, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद चौधरी, डॉ. राजेंद्र बौद्ध, रमेश चंद्र गौतम, हरीराम, श्रीमती सरोज गौतम, रेनू बाला, का. रामलौट, अखिलेश गौतम, अजय आजाद, मूलचंद, अशोक निरंकारी, महबूब आलम, राम निरंजन राना, अशोक कुमार बौद्ध, महेंद्र कुमार, धर्मेंद्र कुमार, बांकेलाल, राम आशीष मौर्य, मंगल सिंह राव, रामशंकर आजाद, संतराम आर्य, श्रवण कुमार, अश्विनी राज, अजय राज, राम कुमार, हरिश्चंद्र सहित हजारों की संख्या में जनपद के विभिन्न हिस्सों से आए लोग शामिल रहे।
भाजपा की आलोचना
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भाजपा और गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सोच हमेशा से बाबा साहब के सिद्धांतों के विपरीत रही है। वक्ताओं ने कहा, “बाबा साहब ने सदियों से पीड़ित समाज को शिक्षित और सशक्त बनाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने का जो कार्य किया, उसे कमजोर करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखीं:
- गृह मंत्री अमित शाह को उनके बयान के लिए तत्काल बर्खास्त किया जाए।
- बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
- संविधान और दलित-पिछड़े समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सामाजिक सौहार्द्र का आह्वान
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बाबा साहब का अपमान केवल दलित और पिछड़े समाज का अपमान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द्र पर भी गहरा प्रहार है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे बयान न केवल समाज को बांटते हैं, बल्कि सामाजिक असमानता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने संविधान की रक्षा और सामाजिक समरसता बनाए रखने का आह्वान किया।
इस प्रदर्शन के माध्यम से दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे बाबा साहब अंबेडकर के सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि गृह मंत्री को जल्द बर्खास्त नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे। यह प्रदर्शन न केवल बाबा साहब के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण था।

