बस्ती के हाईवे पर अब ओवरस्पीड वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता देते हुए ट्रैफिक पुलिस ने स्पीड रडार लेजर डिवाइस तकनीक का उपयोग शुरू कर दिया है। सोमवार को इस तकनीक के जरिए पांच वाहनों का चालान किया गया।
कैमरा जैसा दिखने वाला डिवाइस बना चर्चा का विषय
टीएसआई अवधेश तिवारी अपनी टीम के साथ हाईवे पर जब इस डिवाइस को लेकर पहुंचे, तो लोगों में इसे लेकर जिज्ञासा बढ़ गई। कैमरा जैसा दिखने वाला यह उपकरण दरअसल वाहनों की स्पीड मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जैसे ही राहगीरों को यह पता चला कि यह ओवरस्पीडिंग पकड़ने का यंत्र है, वे सतर्क हो गए और अन्य वाहन चालकों को भी धीमे चलने की चेतावनी देने लगे।
कैसे काम करता है लेजर डिवाइस?
टीएसआई अवधेश तिवारी ने बताया कि यह डिवाइस वाहन की नंबर प्लेट पर लेजर फोकस कर उसकी गति और मालिक की जानकारी रिकॉर्ड करता है। तेज रफ्तार से वाहन चलाने पर चालान तुरंत किया जाता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं को कम करना और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।
स्पीड लिमिट की सख्ती से निगरानी
नेशनल हाईवे पर वाहनों की स्पीड लिमिट तय है:
- कार: 80 किमी प्रति घंटा
- बस: 60 किमी प्रति घंटा
- ट्रक और बाइक: 50 किमी प्रति घंटा
इनसे अधिक गति पर चलने वाले वाहनों पर तुरंत कार्रवाई होगी।
लोगों को किया गया जागरूक
चेकिंग के दौरान पुलिस ने वाहन चालकों को तेज गति के खतरों के बारे में जागरूक भी किया। पुलिस का मानना है कि अगर चालक स्पीड लिमिट का पालन करें, तो दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
ओवरस्पीडिंग पर अभियान होगा जारी
टीएसआई तिवारी ने बताया कि यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा। हाईवे पर पुलिस की टीम नजर रखेगी और लेजर डिवाइस के जरिए ओवरस्पीड वाहनों पर नकेल कसी जाएगी।

