बस्ती। बाढ़ राहत के लिए आवंटित सरकारी धन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और गबन का मामला उजागर हुआ है। बाढ़ कार्य खंड प्रथम में जांच के बाद 79 लाख रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। इस गंभीर मामले में बाढ़ खंड के दो सहायक अभियंताओं ने अलग-अलग तहरीर देकर कोतवाली में दो तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
पहला मामला: 25.8 लाख रुपये का गबन
करीब आठ साल पहले बाढ़ कार्य खंड प्रथम में तैनात तत्कालीन अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) वीरेंद्र कुमार सिंह पर 25.8 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार सिंह की शिकायत के अनुसार, वीरेंद्र कुमार ने बाढ़ राहत के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया और शासकीय क्षति पहुंचाई। वीरेंद्र कुमार वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
दूसरा मामला: 53.96 लाख की वित्तीय अनियमितता
दूसरे मामले में, तत्कालीन अधिशासी अभियंता हरि नारायण सिंह पर 53.96 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। सहायक अभियंता शीलभद्र सिंह ने तहरीर में बताया कि जांच में एक मद का पैसा दूसरे मद में खर्च किए जाने का मामला सामने आया। यह कार्रवाई शासन स्तर से हुई जांच के बाद की जा रही है। हरि नारायण सिंह भी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
बाढ़ पीड़ितों में नाराजगी
बाढ़ राहत के नाम पर हुए इस गबन ने स्थानीय जनता में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण बाढ़ से राहत के लिए आवंटित धन का सही उपयोग नहीं हो पाया, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गईं।
क्या कहता है कानून?
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी धन के गबन के दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को कठोर सजा का प्रावधान है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

