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संसद सत्र में राघव चड्ढा ने उठाया बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और इस्कॉन पुजारी की गिरफ्तारी का मुद्दा

सांसद राघव चड्ढा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और इस्कॉन पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने मांग की कि सदन सामूहिक रूप से इस्कॉन पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की हिरासत पर चर्चा करे और इसकी निंदा करें।

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र जारी है, लेकिन लगातार हो रहे हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हो रही है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और इस्कॉन के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का गंभीर मुद्दा उठाया।

राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कार्यवाही स्थगित करने का नोटिस देकर इस मामले पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और इस्कॉन पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की अवैध गिरफ्तारी पर सदन में गहन चर्चा होनी चाहिए।”

सरकार से मांगा जवाब

चड्ढा ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां के हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए भारत ने क्या कूटनीतिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि सदन चिन्मय दास की गिरफ्तारी के खिलाफ एकजुट होकर निंदा प्रस्ताव पारित करे।

बांग्लादेश में हिंसा और तख्तापलट

हाल ही में बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। इस्कॉन के मुख्य पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी इस घटना की निंदा करते हुए पुजारी की गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

राजनीतिक विवाद तेज

इस मुद्दे को लेकर भारतीय संसद में भी तनाव बढ़ गया है। राघव चड्ढा ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ हो रहे अन्याय पर चुप्पी साधना गलत है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह बांग्लादेश सरकार से इस मुद्दे पर क्या बातचीत कर रही है।”

सदन में चर्चा की मांग

सांसद चड्ढा ने हिंदू अल्पसंख्यकों के प्रति सहानुभूति दिखाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदन से एक स्वर में बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “संसद को बांग्लादेश में हो रहे इन अत्याचारों की कड़ी निंदा करनी चाहिए।”

क्या है आगे की राह?

सदन में इस मुद्दे को लेकर चर्चा होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच रहा है, और भारत सरकार पर इस दिशा में ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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