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बस्ती: पराली के बदले गोबर की खाद, सरकार की नई योजना से प्रदूषण पर लगेगी लगाम

एफपीओ के माध्यम से कृषि विभाग किसानों को गोशालाओं में पराली देने के लिए प्रेरित कर रहा है। किसानों को पराली के बदले गोशालाओं से गोबर की खाद मुहैया कराई जा रही है। सरकार की इस योजना से जहां किसान के खेतों में फसल लहलहा सकेगी, वहीं वायु प्रदूषण भी नियंत्रित होगा।

बस्ती, पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण और कृषि अवशेषों के उचित प्रबंधन को लेकर सरकार ने किसानों के लिए नई योजना की शुरुआत की है। कृषि विभाग किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के माध्यम से गोशालाओं में पराली पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके बदले में किसानों को गोबर की खाद मुहैया कराई जा रही है। इसका उद्देश्य पराली जलाने को रोकना और पर्यावरण को स्वच्छ बनाना है।

योजना का उद्देश्य

पराली जलाने से निकलने वाले धुएं के कारण वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है। इसके दुष्प्रभाव न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ते हैं। इस योजना के जरिए पराली का उपयोग गोशालाओं में चारे और खाद तैयार करने में किया जाएगा। बदले में किसान गोशालाओं से गोबर की खाद प्राप्त करेंगे, जिसे वे अपने खेतों में उपयोग कर सकते हैं।

कैसे काम करती है योजना?

  • पराली का संग्रहण: किसान खेतों से पराली इकट्ठा करके एफपीओ को देंगे।
  • गोशालाओं में उपयोग: एफपीओ पराली को पास की गोशालाओं में पहुंचाएगा। वहां इसे गायों के बिस्तर और चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
  • गोबर खाद का वितरण: गोशालाओं की गोबर खाद किसानों को प्रदान की जाएगी। यह खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में मदद करेगी।

पराली जलाने की समस्या

हर साल पराली जलाने की समस्या से उत्तर भारत के कई राज्यों में वायु गुणवत्ता खराब हो जाती है। प्रदूषण के कारण सांस लेने की समस्याएं और अन्य बीमारियां बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही, खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है।

सरकार की सख्ती

सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। निगरानी के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।

किसानों को मिलेंगे कई फायदे

  1. मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार: गोबर खाद के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरता में सुधार होगा।
  2. कम लागत: यह खाद रासायनिक उर्वरकों की तुलना में सस्ती और प्राकृतिक होती है।
  3. प्रदूषण नियंत्रण: पराली जलाने से बचने पर वायु प्रदूषण में कमी आएगी।

एफपीओ की भूमिका

एफपीओ इस योजना का मुख्य आधार है। यह पराली का संग्रहण, परिवहन और गोशालाओं में आपूर्ति का काम करेगा। साथ ही, किसानों को गोबर खाद वितरण की प्रक्रिया में भी एफपीओ अहम भूमिका निभाएगा।

गोशालाओं में पराली का उपयोग

पराली का गोशालाओं में कई उपयोग होंगे

  1. चारे के रूप में: गायों को खिलाने के लिए पराली का उपयोग किया जाएगा।
  2. बिस्तर के रूप में: गायों के लिए पराली का बिस्तर तैयार किया जाएगा।

पराली के बदले गोबर खाद योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। यह न केवल पराली जलाने की समस्या को हल करेगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति और खेती की उत्पादकता में भी सुधार लाएगी। किसानों को इस योजना से जुड़कर सरकार के इस प्रयास को सफल बनाने में सहयोग देना चाहिए।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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