गड़वल में मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की के साथ की छेड़खानी, निष्क्रिय है बस्ती पुलिस

ऐसी घटनाएं न केवल पीड़ित परिवार को बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती हैं। अगर समय रहते पुलिस ने उचित कार्रवाई की होती, तो पीड़ित परिवार को इतना संघर्ष न करना पड़ता।

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बस्ती जिले के गड़वल गांव में एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक किशोरी के साथ दुर्व्यवहार का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता की मां, शांति देवी, ने CO बस्ती को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। शांति देवी के मुताबिक, उनकी 19 वर्षीय बेटी करिश्मा के साथ 5 नवंबर 2024 को ग्रामसभा बसहवा (गौरा) के प्रधान और हिस्ट्रीशीटर उस्मान के बेटे फरहान ने बुरी नीयत से छेड़खानी की।

क्या है मामला?

शांति देवी, जिनके पति महेंद्र कुमार कतर में रोजगार के सिलसिले में रहते हैं, अपने घर में दो बेटियों के साथ रहती हैं। घटना के दिन शांति देवी अपने खेत में धान काट रही थीं, जबकि उनकी बेटी करिश्मा धान ढोकर घर ला रही थी। तभी रास्ते में फरहान ने करिश्मा को पीछे से धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया और जबरन कपड़े को फाड़ छेड़खानी करने लगा।

तुरंत मदद की कोशिश

घटना के बाद, शांति देवी ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। उन्होंने महिला हेल्पलाइन 1090 पर भी शिकायत दर्ज कराई। मौके पर गनेशपुर चौकी इंचार्ज चंद्रप्रकाश यादव अपनी टीम के साथ पहुंचे। शांति देवी और उनकी बेटी करिश्मा ने उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। चौकी इंचार्ज ने आश्वासन दिया कि आरोपी फरहान को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

शांति देवी का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 7 नवंबर को उन्हें चौकी बुलाया गया, जहां दरोगा ने समझौते के लिए दबाव बनाया। शांति देवी के मुताबिक, दरोगा ने कहा, “तुम गरीब लोग हो। विपक्षी दबंग और पैसे वाला है। उससे लड़ना तुम्हारे लिए मुश्किल होगा।”

दरोगा ने यह भी सलाह दी कि उनके पति लौट आएं, तब ही कोई कार्रवाई की जाए। डर और असहायता के चलते, शांति देवी ने पति के आने तक कानूनी कार्रवाई न करने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

पीड़ित परिवार की हालत

पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी इस घटना के बाद से गहरे सदमे में है। उसे बाहर निकलने से डर लगता है। वहीं, परिवार को सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है।

अब मां ने उठाई न्याय की मांग

अब जब शांति देवी के पति कतर से वापस लौट आए हैं, उन्होंने CO को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। शांति देवी ने मांग की है कि फरहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो उनकी बेटी के साथ इससे भी गंभीर घटना हो सकती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही बस्ती पुलिस द्वारा नहीं की गई है, जो स्वयं में बेहद शर्मनाक है। बल्कि पीड़िता के पिता ने पुलिस पर समझौता करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। लोग इस घटना को लेकर बेहद नाराज हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

महिला सुरक्षा पर सवाल

यह घटना महिला सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े करती है। ऐसी घटनाएं न केवल पीड़ित परिवार को बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती हैं। अगर समय रहते पुलिस ने उचित कार्रवाई की होती, तो पीड़ित परिवार को इतना संघर्ष न करना पड़ता।

क्या कहता है कानून?

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करना पुलिस का दायित्व है। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति या सामाजिक दबाव को ध्यान में रखते हुए समझौते का दबाव बनाना न केवल अनैतिक है बल्कि कानून के खिलाफ भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करना पुलिस का दायित्व है। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति या सामाजिक दबाव को ध्यान में रखते हुए समझौते का दबाव बनाना न केवल अनैतिक है बल्कि कानून के खिलाफ भी है। गड़वल में हुई इस घटना ने न केवल प्रशासन बल्कि समाज को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है। न्याय मिलने तक यह परिवार, खासकर करिश्मा, मानसिक और सामाजिक पीड़ा से जूझता रहेगा।


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