बस्ती जिले के रूधौली क्षेत्र में साधन सहकारी समितियों पर डीएपी खाद की भारी कमी देखी जा रही है, जिसके कारण किसानों को प्राइवेट दुकानों पर उंचे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। गेहूं की बुवाई के लिए डीएपी खाद की मांग में वृद्धि होने के साथ ही सरकारी समितियों से खाद की आपूर्ति कम हो गई है, जिससे किसानों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
साधन सहकारी समितियों पर मारामारी
मंगलवार को रूधौली स्थित साधन सहकारी समिति पर डीएपी खाद की खेप पहुंचने की सूचना मिलते ही किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खाद लेने के लिए किसानों के बीच मारामारी की स्थिति उत्पन्न हो गई। समिति के अधिकारियों के अनुसार, खाद की आपूर्ति थोड़ी कम होने के कारण कुछ किसानों को बिना खाद लौटना पड़ा। वहीं, सुरुवार कला और बसडिला समिति में खाद वितरण क्रमशः सुचारु रूप से चल रहा था, लेकिन डीएपी खाद की आपूर्ति में विलंब किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
प्राइवेट दुकानों पर ऊंचे दामों पर बिक रही खाद
किसान अब प्राइवेट दुकानों का रुख करने पर मजबूर हो गए हैं, जहां डीएपी खाद ₹1450 प्रति बोरी के दाम पर बिक रही है, जो कि सरकारी दुकानों से कहीं अधिक है। किसानों का कहना है कि उन्हें इस महंगे दाम में खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि उनकी फसल की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उचित खाद की आपूर्ति जरूरी है।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें
किसानों का कहना है कि गेहूं की बुवाई के लिए डीएपी खाद की अत्यधिक आवश्यकता है, लेकिन सरकारी आपूर्ति के संकट के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाए और प्राइवेट दुकानों पर ऊंचे दामों पर बिक रही खाद पर कार्रवाई की जाए।
सरकारी समितियों में सुधार की आवश्यकता
किसानों का आरोप है कि सरकारी व्यवस्था में सुधार की सख्त आवश्यकता है। यदि समय रहते खाद की आपूर्ति नहीं की जाती है, तो इसका नकारात्मक असर उनकी फसल पर पड़ सकता है। किसानों ने सरकारी समितियों से जल्द से जल्द खाद का स्टॉक उपलब्ध कराने की अपील की है ताकि वे अपनी फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का सही समय पर उपयोग कर सकें।
प्रशासन को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता
किसानों के बीच बढ़ते आक्रोश और खाद की किल्लत को देखते हुए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह समस्या किसानों की बुवाई प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
किसान संगठनों और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन से इस मुद्दे को शीघ्र सुलझाने की मांग की है, ताकि किसानों को खाद के लिए उचित दर पर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

