बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे मिहिपुरवा ब्लॉक के दो गांवों में शुक्रवार को कुत्तों के हमले से हड़कंप मच गया। इस घटना में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। यह घटना ग्रामीणों के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरी, क्योंकि कुत्तों के झुंड ने कई लोगों पर हमला कर दिया था।
दो स्थानों पर हुआ हमला
शुक्रवार सुबह मंझरा ग्राम पंचायत के मायावती और छोटकन नामक दो व्यक्तियों पर कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया। जैसे ही उन्होंने शोर मचाया, आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्तों को खदेड़कर घायलों को बचाया। वहीं, मोतीपुर इलाके के गिरगिट्टी बाजार में भी कुत्तों के झुंड ने रोहित, जनमेजय, अंजली और दीपक पर हमला कर दिया। एक साथ कई कुत्तों के हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों की हिम्मत से कुत्तों को खदेड़ा
ग्रामीणों ने स्थिति को संभालते हुए कुत्तों को लाठी-डंडों से मारकर भगाया और घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। डॉक्टरों ने सभी घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, हालांकि उनका इलाज जारी है।
वन विभाग और प्रशासन पर नाराजगी
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जंगल से सटे क्षेत्रों में अक्सर जंगली जानवरों और आवारा कुत्तों का खतरा बना रहता है, लेकिन इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रशासनिक सख्ती की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जंगल के पास स्थित गांवों में जंगली जानवरों और आवारा कुत्तों से सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। प्रशासन और वन विभाग को इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कुत्तों के हमले ने बहराइच जिले के ग्रामीणों में दहशत फैला दी है और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े।

