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बस्ती: मिड डे मील रसोइया यूनियन की मंडल स्तरीय बैठक 9 नवंबर को, निजीकरण और वेतन समेत कई मुद्दों पर बनेगी रणनीति

मिड डे मील रसोइया कर्मचारी यूनियन की संयुक्त बैठक 9 नवंबर को बस्ती में होगी, जिसमें सरकारी स्कूलों के मर्जर, वेतन वृद्धि, पेंशन, बीमा और अन्य मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, आंदोलन को और तेज करने की योजना बनाई जाएगी।

बस्ती, 07 नवंबर। मिड डे मील रसोइया कर्मचारी यूनियन की मंडल स्तरीय संयुक्त बैठक 9 नवंबर को बस्ती के प्रेस क्लब भवन में आयोजित की जाएगी। इस अहम बैठक में यूनियन की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हिमी ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष के.के. तिवारी भी शामिल होंगे।

बैठक में प्रमुखता से उन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जो वर्तमान में मिड डे मील कर्मचारियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों को छात्र संख्या के आधार पर मर्ज करने की प्रक्रिया, मिड डे मील योजना का निजीकरण करने की संभावनाएं, और चंद्रावती केस में हाई कोर्ट के आदेश के बाद न्यूनतम वेतन का मुद्दा प्रमुख रहेगा। इन सभी मामलों में सरकार की योजनाओं और नीतियों पर विचार करते हुए यूनियन की रणनीति तय की जाएगी।

निजीकरण और न्यूनतम वेतन की मांगें होंगी मुख्य एजेंडा

बैठक में मिड डे मील की व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के प्रयास पर यूनियन का रुख साफ किया जाएगा। यूनियन ने हमेशा से सरकारी योजनाओं में कर्मचारियों की सुरक्षा और स्थायित्व की बात की है। इसी तरह चंद्रावती केस में आए हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार न्यूनतम वेतन, 12 माह का मानदेय, पेंशन, बीमा, मृतक आश्रित लाभ जैसी सुविधाओं की मांगों को फिर से उठाने पर चर्चा होगी।

संगठित होकर आंदोलन को देंगे नई दिशा

यूनियन के मंडल संयोजक ध्रुव चंद ने जानकारी दी कि इस बैठक में यूनियन की सांगठनिक मजबूती पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में मिड डे मील कर्मियों के लिए राज्यव्यापी आंदोलन चल रहा है, और इस बैठक के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जाएगी। संगठन का उद्देश्य है कि रसोइयों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाए और मांगों के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाए।

रसोइया कर्मियों की जीवन सुरक्षा पर भी होगी चर्चा

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि मिड डे मील रसोइयों के लिए पेंशन, बीमा और मृतक आश्रित योजनाएं भी लागू की जाएं। यूनियन का मानना है कि स्थायी और अस्थायी रूप से जुड़े हुए सभी कर्मचारियों के जीवन और काम की सुरक्षा होनी चाहिए। इस मौके पर यूनियन के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता भी अपने विचार साझा करेंगे और कर्मचारियों को संघर्ष के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

प्रमुख बिंदु:

  • मिड डे मील निजीकरण का विरोध
  • न्यूनतम वेतन, पेंशन और बीमा पर मांग
  • संगठित होकर आंदोलन को बढ़ाने की रणनीति

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष के.के. तिवारी का वक्तव्य

प्रदेश अध्यक्ष के.के. तिवारी का कहना है कि सरकार को मिड डे मील रसोइयों की अनदेखी बंद करनी चाहिए और उनके वेतन और सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यूनियन का संघर्ष और भी तेज किया जाएगा।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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