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आगरा के जिला अस्पताल में कुत्तों और बंदरों का आतंक, मरीजों और तीमारदारों के लिए मुश्किलें बढ़ीं

अस्पताल के वॉर्डों और परिसर में बेखौफ घूमते ये जानवर न केवल मरीजों और तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं, बल्कि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। मंगलवार को पीकू वॉर्ड में एक कुत्ता बेड के नीचे आराम फरमाता दिखा, जिससे लोगों में खौफ और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं।

आगरा: आगरा के जिला अस्पताल में इन दिनों कुत्तों और बंदरों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल के वॉर्डों और परिसर में बेखौफ घूमते ये जानवर न केवल मरीजों और तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं, बल्कि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। मंगलवार को पीकू वॉर्ड में एक कुत्ता बेड के नीचे आराम फरमाता दिखा, जिससे लोगों में खौफ और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं।

तीमारदारों का खाना छीन रहे जानवर

अस्पताल में आए तीमारदार अपने साथ अक्सर खाने-पीने का सामान लाते हैं, लेकिन बंदर और कुत्ते उनके पास पहुंचकर उनका खाना छीनने में लग जाते हैं। तीमारदारों ने शिकायत की कि बंदर और कुत्ते उनके हाथों से खाना छीनकर भाग जाते हैं, जिससे वे न केवल असुरक्षित महसूस करते हैं, बल्कि अपने बीमार परिजनों की देखभाल करने में भी दिक्कत का सामना कर रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन ने निगम से की कई शिकायतें

इस संबंध में अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (सीएमएस) डॉ. राजेंद्र अरोरा का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने इस समस्या को हल करने के लिए नगर निगम को कई बार शिकायत की है, लेकिन नगर निगम से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़ने पर कुछ लोग आपत्ति जताते हैं, जिसके चलते निगम ने कार्रवाई से हाथ खींच लिए। हालांकि, अस्पताल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि वॉर्डों में जानवरों को न घुसने दें और उन्हें परिसर से बाहर करने का प्रयास करें।

कानूनी अड़चनें और प्रशासन की बेबसी

डॉ. अरोरा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर नगर निगम इस मुद्दे से किनारा कर रहा है। उनका कहना है कि कोर्ट के निर्देशानुसार जानवरों को उनके ठिकानों से हटाने पर रोक है, जिसके चलते निगम भी असहाय महसूस कर रहा है। यह स्थिति तीमारदारों और मरीजों के लिए न केवल असुविधाजनक, बल्कि खतरनाक भी साबित हो रही है।

नगर निगम पर उठ रहे सवाल

अस्पताल प्रशासन की ओर से नगर निगम की लापरवाही पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मरीजों के परिजन नगर निगम से यह उम्मीद कर रहे हैं कि वह इस समस्या का समाधान निकाले, ताकि अस्पताल परिसर और वॉर्ड सुरक्षित रहें। लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या नगर निगम की अनदेखी और अस्पताल प्रशासन की बेबसी से यह समस्या और विकराल रूप लेती जाएगी, या प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम उठाएगा।

कब मिलेगा समाधान?

अस्पताल में दिन-प्रतिदिन बढ़ते जानवरों के आतंक से लोगों में चिंता बढ़ रही है। अब देखना यह है कि नगर निगम इस समस्या को लेकर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और जिला अस्पताल प्रशासन अपने परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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