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प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन: ‘हमें बेरोजगार रामराज्य नहीं चाहिए!’

1000 से अधिक प्रदर्शनकारी, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, आयोग के सामने जमा हुए और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के बाहर मंगलवार को एक अभूतपूर्व प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों TGT-PGT अभ्यर्थियों ने बेरोजगारी के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। करीब 1000 से अधिक प्रदर्शनकारी, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, आयोग के सामने जमा हुए और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। अभ्यर्थियों ने पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद सरकार पर बेरोजगार युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।

अभ्यर्थियों की मांगें:

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने गुस्से में कहा, “हमें ऐसा रामराज्य नहीं चाहिए, जहां हम बेरोजगार होकर सड़कों पर भटकते रहें। सरकार हमें बार-बार आश्वासन देती है, लेकिन हकीकत में हमारे लिए कुछ नहीं किया जा रहा।”

कौशांबी से आए 45 वर्षीय प्रदीप कुमार चौधरी, जो 2011 से नौकरी की तलाश में हैं, ने कहा, “मेरी उम्र अब 45 साल हो चुकी है और मैं अब भी बेरोजगार हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने सालों के बाद भी सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा हूं।”

आजमगढ़ से आए आलोक कुमार यादव, जो वर्षों से भर्ती के इंतजार में हैं, ने निराशा व्यक्त की, “दाढ़ी पक गई है, लेकिन नौकरी अब तक नहीं मिली। परिवार और समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकार हमारी आवाज़ नहीं सुन रही।”

प्रमुख मुद्दे और मांगें:

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं:

  1. TGT-PGT व असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए पोर्टल खोलने और परीक्षा तिथियों की तत्काल घोषणा की जाए।
  2. जीव विज्ञान 2011 और कला 2016 के साक्षात्कार कराए जाएं, ताकि अभ्यर्थियों को मौका मिल सके।
  3. प्रतीक्षा सूची को जल्द जारी किया जाए।
  4. शिक्षा आयोग की नियमावली में धारा 12, 18 और 21 को पूर्व की भांति जोड़ा जाए।
  5. 25,000 रिक्त पदों को जल्द से जल्द विज्ञापन में शामिल कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।

सरकार पर उठे सवाल:

युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि विधानसभा में बताया गया था कि एडेड माध्यमिक विद्यालयों में 25,000 पद खाली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी रिक्त पदों को भरने की घोषणा की थी, लेकिन इन पदों को विज्ञापन में शामिल न करने से संदेह पैदा हो रहा है। सिंह ने सवाल उठाया, “क्या सरकार भी इन एडेड विद्यालयों को परिषदीय विद्यालयों की तरह बंद करने की योजना बना रही है?”

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और आक्रोश उस बेरोजगारी का प्रतीक है, जो लंबे समय से युवाओं के लिए एक चुनौती बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन नाराज युवाओं की मांगों का समाधान कैसे करती है और उन्हें रोजगार देने की दिशा में क्या कदम उठाती है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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