लखनऊ में जय प्रकाश नारायण की जयंती पर उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण को लेकर सियासी हंगामा मच गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को जेपी सेंटर जाने से रोक दिया गया है, जिसके बाद उन्होंने अपने आवास के बाहर कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर लोकनायक को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह प्रशासन सपा कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण तरीके से श्रद्धांजलि देने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर रहा है।
आवास के बाहर प्रदर्शन, सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा
अखिलेश यादव ने अपने घर के बाहर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “हम जय प्रकाश नारायण जी की जयंती मनाते हैं, लेकिन यह सरकार हमें उन्हें माला पहनाने से रोकने की कोशिश कर रही है। हमने मजबूरी में सड़क पर ऐसा किया।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जय प्रकाश नारायण के सम्मान में बनाए गए संग्रहालय को बेचने की साजिश कर रही है और इसी वजह से जेपी सेंटर को सील किया गया है।

अखिलेश यादव ने आगे कहा, “आप सोचिए, जो सरकार जय प्रकाश नारायण के नाम पर बनाए गए संग्रहालय को बेचना चाहती है, वह संविधान की रक्षा कैसे कर सकती है? यह सरकार गूंगी, बहरी और अंधी है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज रामनवमी का पर्व है और इसी दिन सरकार ने ऐसा अधर्म किया है।
नीतीश कुमार से समर्थन की अपील
सपा अध्यक्ष ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की कि यह उनके लिए उस सरकार से समर्थन वापस लेने का सही समय है, जो समाजवादियों को जय प्रकाश नारायण की जयंती पर श्रद्धांजलि देने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने कहा, “जय प्रकाश नारायण के नाम पर जो इमारत बनाई गई है, उसे ढका गया है क्योंकि उसके पीछे एक साजिश है। यह सरकार विनाशकारी है।”
सड़क पर माल्यार्पण, सपा का संघर्ष जारी
अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह हर अच्छे काम को रोक रही है। उन्होंने कहा, “हम लोग हर साल जय प्रकाश नारायण की जयंती मनाते हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे। हम सड़क पर खड़े होकर उन्हें याद करेंगे।” इस सियासी हंगामे के बीच सपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर जोरदार हंगामा किया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
सपा के इस प्रदर्शन ने लखनऊ में राजनीति के एक नए मोड़ को जन्म दिया है, जहां नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं। यह घटनाक्रम न केवल समाजवादी पार्टी के लिए, बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।
अखिलेश यादव का यह बयान और सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि राजनीति में प्रतिरोध और संघर्ष का एक नया अध्याय खुल रहा है, जहां नेता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। जय प्रकाश नारायण की जयंती पर इस तरह का हंगामा निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहराई से प्रभाव डालेगा।

