वाराणसी, 24 सितंबर — वाराणसी के ऐतिहासिक राजघाट मालवीय पुल पर मंगलवार की दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक 23 वर्षीय युवक नवीन मौर्या पुल के लोहे के गार्डर पर चढ़कर आत्मघाती कदम उठाने लगा। नौकरी न मिलने से निराश नवीन ने पुल के ऊपर खड़े होकर अपना सिर बार-बार गार्डर से टकराया, जिससे मौके पर मौजूद लोग सकते में आ गए। पुलिस भी पहुंची, लेकिन मदद की बजाय विभागीय सीमा विवाद में उलझकर मूकदर्शक बनी रही। अंततः, युवक की जान उसके परिजनों की सूझबूझ और साहस से बच पाई।
घटना के पीछे की कहानी: डिप्रेशन का शिकार युवक
सारनाथ के दीनापुर इलाके का रहने वाला नवीन मौर्या पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे नवीन ने कई परीक्षाओं के लिए आवेदन किया था, लेकिन बार-बार असफल होने के कारण वह अवसाद में चला गया था। दोस्तों और परिवार वालों के मुताबिक, नवीन ने हाल के दिनों में कई बार अपनी निराशा व्यक्त की थी। वह अक्सर कहता था, “कब तक भाई से पैसे मांगता रहूंगा?” इसी निराशा में डूबा नवीन मंगलवार की सुबह राजघाट पुल की ओर निकल पड़ा।

पुलिस की उदासीनता और परिजनों की बहादुरी
नवीन के पुल पर चढ़ने की सूचना मिलते ही रामनगर थाने की सूजाबाद चौकी की पुलिस और ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन युवक आदमपुर थाना क्षेत्र में होने के कारण, रामनगर पुलिस ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और स्थिति को अनदेखा करने लगी। इस दौरान, नवीन के परिवार वालों को भी बुला लिया गया। जैसे ही उसके परिजन मौके पर पहुंचे और उसे नीचे उतरने की अपील करने लगे, नवीन अपना सिर गार्डर से जोर-जोर से टकराने लगा। परिजनों ने खुद ही जिम्मेदारी संभाली। नवीन के बड़े भाई प्रवीण और रिश्तेदार कृष्ण कुमार ने बेहोश हालत में नवीन को किसी तरह गार्डर से नीचे उतारा और उसकी जान बचाई।
“बेटे को नौकरी न मिलने का था गहरा सदमा”
नवीन के रिश्तेदार कृष्ण कुमार ने बताया, “नवीन के पिता मनोज मौर्या एक शिक्षित और संभ्रांत व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दी है। बड़ा बेटा जॉब कर रहा है, जबकि नवीन सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा था।” उन्होंने कहा कि नवीन का नौकरी न मिल पाने का दुख उसे मानसिक रूप से कमजोर बना रहा था, और इसी निराशा में उसने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की।
मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ती चिंता
मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं में बढ़ते तनाव पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नौकरी की निरंतर असफलता से हताश युवा मानसिक रूप से टूट रहे हैं, और समय पर सही सहयोग न मिलने पर खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं।
नवीन फिलहाल अपने घर लौट चुका है, लेकिन इस घटना ने प्रशासन की भूमिका और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की जिम्मेदारी पर गंभीर विचार करने की जरूरत को सामने रखा है।

