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गंगा स्नान के दौरान डिप्टी डायरेक्टर की डूबने से मौत,स्थानीय तैराक ने उन्हें बचाने के बदले की 10,000 रुपये मांग की

आदित्यवर्धन गहरे पानी में चले गए, और उनका पैर फिसलने से वह नदी में डूबने लगे,स्थानीय तैराक ने उन्हें बचाने के बदले 10,000 रुपये की मांग की

उन्नाव जिले के बांगरमऊ क्षेत्र के रहने वाले और बनारस में स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात आदित्यवर्धन सिंह उर्फ गौरव की गंगा नदी में डूबने की दुखद घटना सामने आई है। आदित्यवर्धन सिंह अपने दो दोस्तों प्रदीप तिवारी और योगेश्वर मिश्रा के साथ गंगा स्नान के लिए बिल्हौर क्षेत्र के नानामऊ गांव पहुंचे थे, जहां यह हादसा हुआ।

घटना के दौरान आदित्यवर्धन गहरे पानी में चले गए, और उनका पैर फिसलने से वह नदी में डूबने लगे। इस कठिन परिस्थिति में वहां मौजूद स्थानीय तैराक ने उन्हें बचाने के बदले 10,000 रुपये की मांग की। इस दौरान, उनके दोस्त प्रदीप तिवारी ने तुरंत ही ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए, लेकिन दुर्भाग्यवश, पैसे पहुंचने तक आदित्यवर्धन गहरे पानी में समा चुके थे। इस घटना ने समय पर मदद न मिलने की गंभीरता और मानवीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आदित्यवर्धन सिंह उन्नाव जिले के बांगरमऊ क्षेत्र के कबीरपुर गांव के निवासी थे और उनका परिवार लखनऊ के इंदिरानगर में रहता है। शनिवार को उन्होंने अपने दोस्तों के साथ लखनऊ से बांगरमऊ के नानामऊ क्षेत्र की यात्रा की थी। गंगा स्नान के दौरान हुई इस त्रासदी ने उनके परिवार और परिचितों को गहरे शोक में डाल दिया है।

गंगा में डूबे डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन गौरव की पत्नी श्रेया मिश्रा महाराष्ट्र के अकोला ज़िले में न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं। घटना की सूचना मिलते ही वह भी घटनास्थल पर पहुंचने के लिए चल चुकी हैं। वहीं बहन गुड़िया वर्तमान में आस्ट्रेलिया में उच्च पद पर तैनात है।

आदित्य वर्धन गौरव का चचेरा भाई अनुपम सिंह बिहार प्रांत में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी है। वह पटना सहित करीब एक दर्जन जिलों में जिलाधिकारी सहित कई उच्च पदों पर तैनात रहे हैं। वर्तमान समय में वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निजी सचिव हैं।

कानपुर प्रशासन ने इस घटना के बाद तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया, जिसमें मोटर चलित बोट और स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जा रही है। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है, लेकिन अभी तक आदित्यवर्धन सिंह का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

स्थानीय तैराक द्वारा समय पर मदद न करने और पैसे की मांग करने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठे हैं। कहा जा रहा है कि यदि त्वरित रूप से बचाव प्रयास किया गया होता, तो शायद आदित्यवर्धन सिंह की जान बचाई जा सकती थी। अब उनके परिवार और दोस्तों की आंखें प्रशासनिक प्रयासों पर टिकी हैं, जो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पीछे की सच्चाई उजागर करेंगे।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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