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कबीर हत्याकांड: पाँच साल बाद भी न्याय की लड़ाई जारी, बड़े भाई ने शुरू की दिल्ली तक पदयात्रा

कई प्रमुख नेता, जिनमें वर्तमान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद शामिल थे, कबीर तिवारी के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया था कि इस मामले में जल्द से जल्द न्याय मिलेगा। लेकिन पाँच साल बाद भी, न्याय की वह किरण कबीर तिवारी के परिवार से कोसों दूर है।

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुए बहुचर्चित कबीर तिवारी हत्याकांड को पाँच साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस मामले में न्याय की आस लगाए बैठा परिवार संघर्षरत है। 5 साल पहले, छात्र संघ अध्यक्ष कबीर तिवारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड ने न केवल बस्ती जिले में बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।

हत्याकांड के बाद की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई थी। उस समय के कई प्रमुख नेता, जिनमें वर्तमान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद शामिल थे, कबीर तिवारी के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया था कि इस मामले में जल्द से जल्द न्याय मिलेगा। लेकिन पाँच साल बाद भी, न्याय की वह किरण कबीर तिवारी के परिवार से कोसों दूर है।

आरोपियों की बरी होने की घटना

हाल ही में इस मामले में नामज़द आरोपियों को कोर्ट ने बाइज़्ज़त बरी कर दिया, जिससे तिवारी परिवार में गहरा आक्रोश और निराशा फैल गई। न्याय की उम्मीदों पर पानी फिरने के बाद कबीर तिवारी के बड़े भाई तुलसी तिवारी ने CBI जाँच की माँग को लेकर एक अनूठी पहल की। उन्होंने 15 अगस्त से दिल्ली तक पदयात्रा शुरू की, जिसका उद्देश्य इस मामले में न्याय की माँग को पुनर्जीवित करना और दोषियों को सजा दिलाने के लिए CBI जाँच की आवश्यकता पर जोर देना है।

तुलसी तिवारी की न्याय यात्रा

यह पदयात्रा बस्ती के कप्तानगंज से शुरू होकर धीरे-धीरे दिल्ली की ओर बढ़ रही है। पदयात्रा अब तक अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ होते हुए सीतापुर के करीब पहुँच चुकी है। तुलसी तिवारी का कहना है कि वह दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे और उनसे इस मामले में CBI जाँच की माँग करेंगे। उनका यह मानना है कि जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

युवाओं का समर्थन

इस पदयात्रा को युवाओं का भारी समर्थन मिल रहा है। रास्ते में अनेक युवा इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं और न्याय की माँग को समर्थन दे रहे हैं। युवाओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो इससे न्यायिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है। युवाओं के इस समर्थन ने तुलसी तिवारी की न्याय यात्रा को एक नया जोश और ऊर्जा दी है।

न्याय की लंबी लड़ाई

तुलसी तिवारी का कहना है कि वे अपने भाई कबीर तिवारी के लिए न्याय की लड़ाई तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा, “यह केवल हमारे परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए न्याय की लड़ाई है। अगर हम इस लड़ाई को हार जाते हैं, तो यह केवल एक परिवार की हार नहीं होगी, बल्कि यह पूरे समाज की हार होगी।”

CBI जाँच की माँग

तुलसी तिवारी और उनके समर्थकों का मानना है कि जब तक इस मामले की CBI जाँच नहीं होती, तब तक दोषियों को सजा दिलाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि वे इस न्याय यात्रा के माध्यम से सरकार और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुँचाना चाहते हैं ताकि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जा सके।

परिवार की उम्मीदें और संघर्ष

कबीर तिवारी के परिवार का कहना है कि वे न्याय की इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि उन्हें इंसाफ नहीं मिल जाता। परिवार के सदस्य इस हत्याकांड के बाद से लगातार मानसिक और भावनात्मक संघर्ष से गुजर रहे हैं। परिवार को अभी भी न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन आरोपियों के बरी होने के बाद से उनकी निराशा और गहरी हो गई है।

भविष्य की राह

अब सभी की नजरें तुलसी तिवारी की इस न्याय यात्रा पर हैं, जो दिल्ली पहुँचकर गृह मंत्री अमित शाह से मिलने और CBI जाँच की माँग को लेकर अपना पक्ष रखने वाली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पदयात्रा का परिणाम क्या निकलता है और क्या यह यात्रा कबीर तिवारी के परिवार को न्याय दिलाने में सफल हो पाती है।

तुलसी तिवारी का यह कदम न केवल एक व्यक्ति की न्याय की लड़ाई है, बल्कि यह समाज में न्याय और सत्य की स्थापना के लिए एक बड़ी पहल भी है। अगर यह यात्रा सफल होती है और CBI जाँच की माँग पूरी होती है, तो यह न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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