नई दिल्ली – भारत की अर्थव्यवस्था और सरकारी नीतियों पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार है, जिसका प्रमाण जुलाई के महीने में देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) ने जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 32,365 करोड़ रुपये का निवेश किया है। हालांकि, अगस्त के शुरुआती दिनों में एफपीआई ने 1,027 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचकर कुछ पैसे निकाले हैं, जिससे बाजार में थोड़ी हलचल देखने को मिली है।
निवेश की स्थिति:
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में एफपीआई द्वारा किए गए निवेश की यह राशि जून के मुकाबले अधिक है, जब विदेशी निवेशकों ने 26,565 करोड़ रुपये का निवेश किया था। मई में, चुनावी असमंजस के कारण एफपीआई ने 25,586 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई की गतिविधियों में पुनरुत्थान देखा गया।
बजट प्रभाव और भविष्य की दिशा:
बजट में इक्विटी निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद से एफपीआई प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और बाजारों से जुड़े घटनाक्रम अगस्त में एफपीआई की गतिविधियों की दिशा तय करेंगे।
अमेरिकी ब्याज दरों का प्रभाव:
डेजर्व के सह-संस्थापक वैभव पोरवाल ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और कमजोर रोजगार आंकड़ों के मद्देनजर सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। अनुमान है कि ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है।
ग्लोबल प्रभाव और भारतीय बाजार की ओर आकर्षण:
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक – प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ा दिया है, जबकि चीन के वृद्धि दर के अनुमान में कमी की गई है। इस कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
बॉन्ड मार्केट में निवेश:
आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने जुलाई में शेयरों के अलावा ऋण या बॉन्ड मार्केट में 22,363 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस प्रकार, इस साल अब तक बॉन्ड मार्केट में उनका कुल निवेश 94,628 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
जुलाई में एफपीआई द्वारा किए गए भारी निवेश ने भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक संकेत भेजा है, हालांकि अगस्त के पहले दो दिनों में हल्की बिकवाली देखी गई है। भविष्य में अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां एफपीआई की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

